बारां , सितम्बर 27 -- राजस्थान के बारां जिले में ऐतिहासिक डोल मेले का रंगमंच शनिवार की रात हाड़ौती की माटी की महक, ठेठ राजस्थानी अंदाज और कविता के नव रसों से सराबोर रहा।

हाड़ौती के ख्यातनाम कवियों ने हास्य, शृंगार, वीर, करुण और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाओं की ऐसी बौछार की, कि देर रात तक पंडाल तालियों और ठहाकों से गूंजता रहा।

कवि सम्मेलन का शुभारंभ सूत्रधार पवन गोचर ने मां सरस्वती की वंदना से किया। उन्होंने श्रृंगार रस को हाड़ौती के ठेठ अंदाज में पिरोते हुए 'थारे काई हो गयो रूपाली, काया सूखती जारी, फिर भी गुटखा खा री' जैसी पंक्तियों से माहौल में रंग भर दिया।

हास्य रस के महारथी जसराज सलोना ने अपनी चुटीली प्रस्तुतियों से दर्शकों को खूब गुदगुदाया। वहीं 'ई भ्रूण हत्या पर रोक लगानी छ.' जैसी रचना के माध्यम से उन्होंने सामाजिक सरोकार का संदेश भी दिया।

मंच संचालन के साथ काव्य पाठ कर रहे बाबू बंजारा ने शौर्य के प्रतीक चेतक पर अपनी ओजपूर्ण रचना सुनाकर श्रोताओं में जोश भर दिया। "सूतो काई र छ चेतक, पवन वेग सु भाग." की पंक्तियां गूंजते ही पंडाल तालियों से गूंज उठा। इसके बाद उन्होंने हाड़ौती की प्रसिद्ध दाल-बाटी को अपने चिरपरिचित हास्य अंदाज में पिरोया तो श्रोताओं की हंसी छूट गयी।

मध्य क्रम में विष्णु विश्वास ने "बोल-बोल मेहतरानी." के माध्यम से समाज में व्याप्त छुआछूत पर तीखा प्रहार किया और सामाजिक समानता का संदेश दिया। कवि सम्मेलन का भावनात्मक पक्ष राजस्थान के मुकुटमणि राज की प्रस्तुतियों से उभरकर सामने आया। उन्होंने मार्मिक अंदाज में "नैना धरया पाओगा गेला म, भूल मत जाजो सा." सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

"पड़ी तीज री कोल, भूल मत जाजो सा." और "पनघट रो तीर, अखियां में नीर." जैसी रचनाओं की प्रस्तुति पर श्रोताओं की आँखें छलछला आयी।

कवयित्री चंदा पाराशर ने श्रृंगार रस की प्रस्तुति से दर्शकों का मन जीता, वहीं झालावाड़ की प्रतिमा पुलक ने "कंगन डोरा जद खुल जावे." से खूब वाहवाही बटोरी। भेरूलाल भास्कर ने अपनी रचना में मेले के वास्तविक रंग और लोकजीवन का चित्रण किया, जबकि सोनू सुरीला की ओजपूर्ण प्रस्तुति "उठा खड़ग क्षण में रानी ने, खुद की नाड़ उड़ा दी." पर श्रोताओं ने जमकर दाद दी। इसके अलावा नाथूलाल निर्भय, लालचंद सुमन, कमलेश कोकिला, सूरजमल मियाड़ा, सौभाग वैष्णव, देवकी दर्पण, चंपालाल राव और रमेश राजस्थानी सहित अन्य कवियों ने भी अपनी प्रभावी रचनाओं से देर रात तक समां बांधे रखा।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित