रायपुर , अगस्त 25 -- छत्तीसगढ़ के आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने नवा रायपुर अटल नगर को देश की अग्रणी ग्रीनफील्ड सिटी के रूप में विकसित करने पर जोर देते हुए कहा है कि यहां आवासीय सुविधाओं के विस्तार के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक और अन्य क्षेत्रों में तेजी से विकास हो रहा है।

चौधरी ने मंगलवार को नवा रायपुर अटल नगर के सेक्टर-12 फेस-2 में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की 119.89 करोड़ रुपये की आवासीय परियोजना का भूमिपूजन किया। परियोजना के तहत एचआईजी और एमआईजी श्रेणी के कुल 348 भवनों का निर्माण किया जाएगा। आवासों की बढ़ती मांग को देखते हुए इसी सेक्टर में आगामी चरण में 704 नए फ्लैट का निर्माण भी प्रस्तावित है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की कार्यप्रणाली में कई नीतिगत सुधार किए हैं। एक समय कर्ज से जूझ रहे मंडल का करीब 700 करोड़ रुपये का ऋण चुकाकर उसे कर्जमुक्त किया गया है। इसके साथ ही यह नीति निर्धारित की गई है कि बिना मांग के किसी स्थान पर नई आवासीय परियोजना शुरू नहीं की जाएगी।

उन्होंने बताया कि किसी परियोजना में 60 प्रतिशत बुकिंग होने अथवा प्रथम तीन माह में 30 प्रतिशत बुकिंग होने के बाद ही टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इससे मांग आधारित आवासीय परियोजनाओं को बढ़ावा मिलने के साथ बिना मांग के निर्मित भवनों के लंबे समय तक खाली रहने की समस्या से निजात मिलेगी।

आवास एवं पर्यावरण मंत्री ने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश देते हुए कहा कि हाउसिंग बोर्ड को केवल आवास निर्माण तक सीमित न रहकर एक पेशेवर संगठन के रूप में अपनी पहचान मजबूत करनी होगी। भवनों में गुणवत्तापूर्ण टाइल्स, फिटिंग्स और आधुनिक रंगों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। बेहतर सुविधाओं के लिए परियोजना लागत में पांच से 10 प्रतिशत तक वृद्धि होती है तो उसे उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता उपलब्ध कराने के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।

उन्होंने हाउसिंग बोर्ड की कॉलोनियों में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) को मजबूत करने तथा कॉलोनियों का समय पर हैंडओवर सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने सेक्टर-12 के रहवासियों से आरडब्ल्यूए गठित कर कॉलोनी के रखरखाव में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

चौधरी ने कहा कि नवा रायपुर का लगभग एक-तिहाई हिस्सा मनोरंजन एवं अन्य गतिविधियों के लिए विकसित किया गया है, जबकि 28 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र में हरियाली है। यहां एनआईएफटी, एनएफएसयू, एनआईईएलआईटी, आईआईएम, एचएनएलयू और आईआईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान मौजूद हैं। इसके अलावा नरसी मोनजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, श्री श्री रविशंकर का केंद्र, ब्रह्मकुमारी परिसर, एआई डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर यूनिट जैसी परियोजनाएं भी नवा रायपुर के विकास को गति दे रही हैं।

उन्होंने कहा कि नवा रायपुर में स्वास्थ्य सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है। सत्य साईं अस्पताल परिसर के विस्तार के लिए अतिरिक्त भूमि उपलब्ध कराई गई है, जहां हेल्थ ट्रेनिंग सेंटर, जीनोम रिसर्च सेंटर और नर्सिंग कॉलेज जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। नवा रायपुर में खेल, कॉन्फ्रेंस, शिक्षा, स्वास्थ्य और वेडिंग डेस्टिनेशन के क्षेत्र में भी व्यापक संभावनाएं हैं।

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने बताया कि सेक्टर-12 फेस-2 में शेष 29.20 एकड़ भूमि पर एचआईजी और एमआईजी श्रेणी के कुल 348 भवनों का निर्माण किया जाएगा। इन भवनों का बेस विक्रय मूल्य 45.70 लाख रुपये से 85.17 लाख रुपये तक निर्धारित किया गया है।

उन्होंने बताया कि आगामी चरण में इसी सेक्टर में 704 नए फ्लैट बनाए जाएंगे, जिनमें 128 एचआईजी, 320 एमआईजी और 256 एलआईजी श्रेणी के फ्लैट शामिल होंगे। इनका प्रस्तावित बेस विक्रय मूल्य 16.76 लाख रुपये से 40.47 लाख रुपये तक है।

मंडल के सचिव अंकित आनंद ने कहा कि आवासीय परियोजनाओं में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता को प्राथमिकता दी जा रही है। सेक्टर-12 फेस-2 परियोजना को निर्धारित समय-सीमा में पूरा कर हितग्राहियों को गुणवत्तापूर्ण आवास उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

मंडल के आयुक्त अवनीश शरण ने बताया कि नवा रायपुर में मंडल ने वर्ष 2007 में सेक्टर-27 की 154 एकड़ भूमि पर पहली आवासीय कॉलोनी शुरू की थी, जहां 2665 स्वतंत्र भवन एवं फ्लैट बनाकर वर्ष 2014 में आबंटियों को सौंपे गए। सेक्टर-29 में 3012 स्वतंत्र भवन एवं फ्लैट का निर्माण वर्ष 2015 में पूरा किया गया।

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