गोपालगंज, अगस्त 22 -- गोपालगंज के जिलाधिकारी समीर सौरभ ने शनिवार को कहा कि शिक्षा का अलख जगाने के साथ नवाचार के किये मशहूर राष्ट्रीय पुरष्कार के लिए चुनी गई पुष्पा प्रसाद जिले के शिक्षकों के लिए एक मिशाल हैं।
जिलाधिकारी ने श्रीमती प्रसाद के शिक्षा के क्षेत्र में किये गये कार्यों की सराहना की और उन्हें शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि बिहार के गोपालगंज जिले के कुचायकोट प्रखंड में सरकारी विद्यालय के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण एवं आनंददायी शिक्षा से जोड़ने, विद्यालय और समुदाय के बीच मजबूत संबंध स्थापित करने तथा नवाचार के माध्यम से शिक्षण को प्रभावी बनाने वाली कुचायकोट राजकीय कन्या मध्य विद्यालय की शिक्षिका श्रीमती प्रसाद की यह उपलब्धि उल्लखनीय हैं। उन्होंने कहा कि यह चयन उनके समर्पण, नवाचार और उल्लेखनीय शैक्षिक योगदान को एक पहचान है और राष्ट्रपति के हाथों उन्हें यह सम्मान मिलेगा।
जिलाधिकारी ने बताया कि गंडक नदी के तटवर्ती एवं बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में स्थित विद्यालय में कम नामांकन, अनियमित उपस्थिति, ड्रॉपआउट और अभिभावकों की सीमित सहभागिता जैसी चुनौतियों के बीच पुष्पा प्रसाद ने शिक्षा को केवल कक्षा-कक्ष तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने विद्यालय को बच्चों, अभिभावकों और समुदाय के समग्र विकास का केंद्र बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया।
उल्लेखनीय है कि पुष्पा प्रसाद ने बुनियादी साक्षरता एवं संख्याज्ञान को अपनी शिक्षण प्रक्रिया की प्रमुख प्राथमिकता बनाया। अक्षर एवं ध्वनि पहचान से लेकर प्रवाहपूर्ण पठन, समझ के साथ पढ़ने, गणितीय संक्रियाओं, तार्किक सोच एवं समस्या-समाधान जैसी क्षमताओं के विकास पर विशेष जोर दिया।स्थानीय एवं कम लागत वाली सामग्री और गतिविधि-आधारित शिक्षण के माध्यम से उन्होंने बच्चों के लिए सीखने की प्रक्रिया को रोचक बनाया। उन्होंने तकनीक को भी बच्चों की सीखने की प्रक्रिया से जोड़ा। श्रीमाती गुप्ता ने थ्री डी वीडियो के माध्यम से जटिल एवं अमूर्त अवधारणाओं को बच्चों के लिए दृश्य और अनुभवात्मक बनाने का प्रयास किया गया। विद्यालय परिसर के पेड़ों पर क्यू आर कोड आधारित सीखने की व्यवस्था भी उनकी नवाचारी सोच का उदाहरण है।
पुष्पा प्रसाद की कार्यशैली की खासियत विद्यालय और समुदाय के बीच मजबूत साझेदारी है। कक्षा की गतिविधियों के फोटो एवं वीडियो अभिभावकों के व्हाट्सऐप समूह में साझा कर उन्होंने अभिभावकों को बच्चों की पढ़ाई से लगातार जोड़े रखा।मासिक अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठियों, अभिभावक साक्षरता अभियान, शत-प्रतिशत नामांकन अभियान, स्वच्छता, नशा मुक्ति और बाल विवाह निषेध जैसे सामाजिक अभियानों के माध्यम से विद्यालय को समुदाय से जोड़ने का प्रयास किया गया।बालिका शिक्षा एवं सशक्तीकरण को उन्होंने अपने कार्य का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया।
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