दुर्ग , मार्च 21 -- छत्तीसगढ़ में दुर्ग केन्द्रीय कारागाह में चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर इन दिनों आध्यात्मिकता, अनुशासन और सामाजिक समरसता का अनूठा वातावरण देखने को मिल रहा है। जेल परिसर में बंदी भक्ति और आत्मचिंतन के माध्यम से न सिर्फ धार्मिक आस्था को जीवंत कर रहे हैं, बल्कि सकारात्मक बदलाव की दिशा में भी कदम बढ़ा रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, इस दौरान 150 से अधिक पुरुष और करीब 40 महिला बंदियों ने नौ दिनों का व्रत धारण किया है। वहीं, लगभग 60 मुस्लिम बंदी रमजान के रोज़े रखकर आपसी भाईचारे और धार्मिक सौहार्द की मिसाल पेश कर रहे हैं।

जेल परिसर में प्रतिदिन सुबह और शाम भजन-कीर्तन, जस गीत और माता की आराधना का आयोजन किया जा रहा है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। ज्योत-जवारे की स्थापना और नियमित आरती से बंदियों में नई ऊर्जा और आत्मबल का संचार हो रहा है।

बंदियों की आस्था को ध्यान में रखते हुए जेल प्रशासन द्वारा विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। उपवास रखने वाले बंदियों को फल, दूध, मेवे सहित पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जा रहा है, वहीं चिकित्सकों की टीम द्वारा नियमित स्वास्थ्य परीक्षण भी सुनिश्चित किया जा रहा है।

जेल अधीक्षक मनीष सम्भाकर ने बताया कि इस तरह के आयोजन बंदियों के मानसिक और भावनात्मक विकास में सहायक सिद्ध हो रहे हैं। इससे उनमें आत्मसंयम, धैर्य और सकारात्मक सोच विकसित हो रही है।

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