जशपुर , अक्टूबर 15 -- छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में शारदीय नवरात्र के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों के लिए मिट्टी के दीयों की मांग बढ़ने से कुम्हारों का कारोबार तेज हो गया है। आगामी दीपावली पर्व को देखते हुए भी कुम्हार बड़ी संख्या में दीये तैयार करने में जुटे हैं। हालांकि, मौसम में बदलाव और रुक-रुककर हो रही बारिश के कारण दीयों को सुखाने में परेशानी आ रही है।
जिले के नारायणपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में पारंपरिक मिट्टी के दीयों का प्रचलन आज भी बना हुआ है। नवरात्र में पूजा-अर्चना और ज्योति प्रज्ज्वलन के लिए इनकी मांग बढ़ी है। वहीं, दीपावली पर संभावित बिक्री को ध्यान में रखते हुए कुम्हार परिवार दिन-रात उत्पादन कर रहे हैं। नारायणपुर क्षेत्र में तैयार दीये स्थानीय बाजारों के साथ कुनकुरी, बगीचा और जशपुर के बाजारों में भी बिक्री के लिए भेजे जाते हैं।
कुम्हारों से आज मिली जानकारी के अनुसार, आधुनिक तकनीक के उपयोग से दीया निर्माण की प्रक्रिया पहले की तुलना में आसान हुई है। अधिकांश कुम्हार अब इलेक्ट्रॉनिक चाक की सहायता से दीये तैयार कर रहे हैं, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है।
कुम्हार राजेश चक्रेश ने बताया कि एक दिन में करीब एक हजार से 1500 दीयों का निर्माण कर लिया जा रहा है। वर्तमान में कुम्हारों का पूरा ध्यान दीयों का उत्पादन बढ़ाने पर है, ताकि दीपावली के दौरान बाजार की मांग पूरी की जा सके।
इस वर्ष मिट्टी के दीयों का बिक्री मूल्य अभी निर्धारित नहीं किया गया है। कुम्हार समाज की ओर से कीमतों को लेकर निर्णय लिया जाना बाकी है। बीते वर्ष मिट्टी के दीये 20 रुपए दर्जन की दर से बेचे गए थे। इस बार महंगाई के कारण कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।
इधर, मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियां कुम्हारों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। आसमान में बादल छाए रहने और बीच-बीच में हल्की बारिश होने से कच्चे दीयों को पर्याप्त धूप नहीं मिल पा रही है। इससे उन्हें सुखाने में सामान्य से अधिक समय लग रहा है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित