नासिक , अक्टूबर 10 -- महाराष्ट्र के नासिक में मूर्तिकार शारदीय नवरात्रि से पहले दुर्गा प्रतिमाओं को पूरा करने के लिए तेज़ी से काम कर रहे हैं। लगभग 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है, जबकि कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और घटती मांग ने उनके कारोबार पर भारी असर डाला है।
ज़िले भर में कई जगहों पर तैयार हो रहे पंडालों के लिए मूर्ति बनाने वाले कलाकार मूर्तियों को अंतिम रूप दे रहे। नौ दिनों तक चलने वाले इस त्योहार में भक्त पूजा-अर्चना, उत्सव और सामुदायिक समारोहों के लिए इकट्ठा होते हैं।
नासिक का मूर्ति-निर्माण बाज़ार साल भर सक्रिय रहता है और विभिन्न धार्मिक अवसरों के लिए मूर्तियां बनाता है। नवरात्रि नज़दीक आने के साथ, मूर्तिकारों ने सार्वजनिक पंडालों और अन्य जगहों पर स्थापना के लिए दुर्गा प्रतिमाओं को पूरा करने पर अपना ध्यान केंद्रित किया है।
मूर्तिकार चंदन का परिवार 32 वर्षों से मूर्ति बनाने के काम में लगा है। उसने कहा कि ज़्यादातर मूर्तियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। स्थापना के लिए तैयार होने से पहले पेंटिंग, कपड़े पहनाना और सजावट जैसे मुख्य काम ही बाकी हैं।
उनके परिवार ने देवी दुर्गा की मूर्तियां बनाने की सालाना परंपरा को जारी रखा है, लेकिन बढ़ती लागत का असर कारोबार पर पड़ा है। उन्होंने बताया कि परिवार को अब तक केवल 15 मूर्तियों के ऑर्डर मिले हैं, जिनकी कीमत 30 हजार रुपये से 42 हजार रुपये के बीच है।
मूर्तियां बांस, लकड़ी, पुआल और मिट्टी का उपयोग करके बनाई जाती हैं। प्रक्रिया बुनियादी ढांचा तैयार करने से शुरू होती है, जिसके बाद सामग्री की परतें चढ़ाई जाती हैं और फिर मूर्तियों को रंगा, सजाया और कपड़े पहनाए जाते हैं।
कोलकाता के मूर्तिकार भी स्थानीय कलाकारों के साथ काम कर रहे हैं, जबकि परिवार के अन्य सदस्य भी इस कला में योगदान देते हैं। चंदन ने कहा कि मूर्तियां मांग के अनुसार बनाई जाती हैं और ग्राहकों को 'कस्टमाइज़्ड डिज़ाइन' के लिए पहले से ऑर्डर देना होता है।
नासिक में मूर्तिकार आम तौर पर देवी के दो रूप बनाते हैं। एक रूप वैष्णो रूप है, जिसमें देवी शेर पर विराजमान होती हैं और इसका उपयोग आमतौर पर जागरण और चौकी जैसे भक्ति कार्यक्रमों के लिए किया जाता है।
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