पटना , जनवरी 28 -- बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने बुधवार को कहा कि राज्य सरकार नवजात शिशुओं के जीवन की रक्षा तथा उन्हें समय पर गुणवत्तापूर्ण और प्रभावी उपचार उपलब्ध कराने के लिए राज्य के विभिन्न जिलों में चिन्हित 115 प्रथम संदर्भ इकाइयों (एफआरयू) में नए नवजात स्थिरीकरण इकाई (एनबीएसयू) स्थापित करेगी।
श्री पांडेय ने आज कहा कि राज्य सरकार विभिन्न जिलों में चिन्हित 115 प्रथम संदर्भ इकाइयों (एफआरयू) में नए नवजात स्थिरीकरण इकाई (एनबीएसयू) की स्थापित करेगी।इसको लेकर राज्य के कई सिविल सर्जनों को निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्री-टर्म, कम वजन (एलबीडब्ल्यू) और जन्म के समय श्वास कष्ट जैसी समस्याओं के कारण बड़ी संख्या में नवजातों की मृत्यु जन्म के पहले सप्ताह में हो जाती है। इन मौतों को रोकने के लिए एनबीएसयू की स्थापना एक निर्णायक पहल है, जिससे बीमार नवजातों को त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल सकेगा।
मंत्री श्री पांडेय ने कहा कि एनबीएसयू की स्थापना संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों में मैटरनिटी वार्ड या लेबर रूम के नजदीक की जाएगी, जिससे जन्म के तुरंत बाद शिशु को आवश्यक देखभाल उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि प्रत्येक एनबीएसयू को रेडिएंट वार्मर, सक्शन मशीन, फोटोथेरेपी यूनिट और स्पॉट लाइट जैसे अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित किया जा रहा है, जिनकी आपूर्ति बीएमएसआईसीएल के माध्यम से की जा रही है।साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी इकाइयां निर्धारित मानकों के अनुरूप पूरी तरह क्रियाशील हों।
श्री पांडेय ने कहा कि एनबीएसयू की स्थापना के दौरान संक्रमण नियंत्रण और सुरक्षा मानकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियमों के तहत कचरे के उचित निपटान की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि एनबीएसयू के प्रभावी संचालन से नवजात मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जाए और हर नवजात को जीवन की सुरक्षित शुरुआत मिल सके।
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