कोंडागांव , फरवरी 22 -- छत्तीसगढ में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का सकारात्मक परिणाम अब जिला मुख्यालयों पर देखने को मिल रहा है, जहां गंभीर से गंभीर बीमारियों का इलाज संभव हो पा रहा है। इसी कड़ी में जिला अस्पताल कोंडागांव की नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एसएनसीयू) ने एक अद्भुत मिसाल पेश की है, जहां चिकित्सकों की टीम ने 27 दिनों तक लगातार प्रयास कर एक नवजात शिशु की जान बचाई। यह घटना न सिर्फ चिकित्सकीय सफलता है, बल्कि जिला स्तर पर उपलब्ध बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का भी प्रमाण है।
जिला पीआरओ से आज (रविवार) को मिली जानकारी के अनुसार,कोंडागांव जिले के विकासखंड माकड़ी के ग्राम राकसबेड़ा निवासी बो सुखदई मरकाम और चैतराम मरकाम के यहां 18 दिसंबर 2025 को एक बच्चे ने जन्म लिया। जन्म के तुरंत बाद शिशु की हालत गंभीर हो गई, जिसके चलते 20 दिसंबर 2025 को उसे जिला अस्पताल की एसएनसीयू में भर्ती कराया गया। जन्म के समय शिशु का वजन 2.70 किलोग्राम था, लेकिन वह बर्थ एस्फिक्सिया, लगातार दौरे और गंभीर संक्रमण से जूझ रहा था। मां की गर्भावस्था के दौरान ओलिगोहाइड्राम्नियोस की समस्या भी सामने आई थी, जिससे शिशु के लिए खतरा और बढ़ गया था।
एसएनसीयू में भर्ती होते ही शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रुद्र कश्यप, डॉ. राजेश बघेल और डॉ. परोमिता सूत्रधार के नेतृत्व में चिकित्सकीय टीम ने उपचार शुरू कर दिया। शुरुआती दिनों में ऑक्सीजन सपोर्ट और एंटीबायोटिक दवाओं के बावजूद शिशु की हालत में सुधार नहीं हुआ। पांचवें दिन स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शिशु को मैकेनिकल वेंटिलेशन पर रखा गया। इस दौरान शिशु में सेप्सिस और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ब्लीडिंग जैसी जानलेवा जटिलताएं भी पाई गईं, जिससे उपचार और चुनौतीपूर्ण हो गया।
चिकित्सकों की टीम ने हार नहीं मानी। उन्होंने शिशु की लगातार निगरानी की और आवश्यकतानुसार उच्च श्रेणी के एंटीबायटिक दिए। बार-बार आने वाले दौरों को नियंत्रित करने के लिए फेनोबार्बिटोन और फेनाइटोइन दवाओं का सहारा लिया गया। करीब 12 दिनों तक वेंटिलेटर पर रखने के बाद लगातार 18 दिनों तक गहन चिकित्सा के तहत शिशु का उपचार जारी रहा। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की इस अथक मेहनत का नतीजा यह रहा कि शिशु धीरे-धीरे खतरे से बाहर निकलने लगा।
शिशु के स्वास्थ्य में सुधार होने पर 19वें दिन से उसे कंगारू मदर केयर (केएमसी) दी जाने लगी, जिससे उसके विकास में तेजी आई। लगातार 27 दिनों तक चिकित्सकों और एसएनसीयू स्टाफ की देखरेख में रहने के बाद शिशु अब पूरी तरह स्वस्थ है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। यह पूरा प्रकरण जिला अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों और टीम वर्क की सफलता की कहानी है।
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