नयी दिल्ली , फरवरी 09 -- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने परीक्षा पे चर्चा (पीपीसी) 2026 के दूसरे एपिसोड में कोयंबटूर, रायपुर, देवमोगरा और गुवाहाटी सहित विभिन्न क्षेत्रों के छात्रों के साथ संवाद किया हैप्रधानमंत्री ने परीक्षा के दबाव को कम करने और युवाओं को प्रेरित करने के उद्देश्य से अपने इस संवादात्मक कार्यक्रम को जारी रखा। इस वर्ष पीपीसी का विशेष संस्करण भारत के कई स्थानों तक फैला हुआ था, जो देश की विशाल विविधता और भावना को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री ने कोयंबटूर में सत्र की शुरुआत करते हुए छात्रों का 'वणक्कम' के साथ गर्मजोशी से स्वागत किया और शिक्षा को जुनून तथा रचनात्मकता के साथ जोड़ने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने छात्रों को पढ़ाई की थकान और तनाव दूर करने के लिए कला का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा, "पढ़ाई और कला को अलग-अलग मत देखो।" उन्होंने युवाओं से उद्योग के पेशेवरों से संपर्क करने का आग्रह किया ताकि वे समझ सकें कि वास्तविक दुनिया में काम कैसे होता है। इसके साथ ही कम उम्र से ही स्टार्टअप और नवाचार को तलाशने के महत्व का भी उल्लेख किया गया।

प्रधानमंत्री ने 2047 तक 'भारत के विकास' विषय पर कहा कि प्रत्येक नागरिक के छोटे-छोटे कार्य राष्ट्र की प्रगति का निर्माण करते हैं। उन्होंने जोर दिया कि अनुशासन ही विकास की कुंजी है। उन्होंने छात्रों को स्वदेशी उत्पादों का समर्थन करके 'वोकल फॉर लोकल' को प्रोत्साहित करने के लिए भी कहा।

श्री मोदी ने टिप्पणी की, "अनुशासन ही कुंजी है, प्रेरणा केवल इसमें इजाफा करती है।" उन्होंने समझाया कि निरंतर प्रयास के बिना प्रेरणा अपर्याप्त है। उन्होंने तकनीक का गुलाम बनने के प्रति आगाह करते कहा इसे एक शक्तिशाली शिक्षक के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि यह सीखने और काम करने की क्षमता बढ़ा सकता है।

शिक्षा और व्यक्तिगत रुचियों के बीच संतुलन बनाने की चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए, प्रधानमंत्री ने छात्रों को आश्वस्त किया कि दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने शौक और खेल के लिये नियमित रूप से समय समर्पित करने की सलाह दी क्योंकि वे संतुलन बनाए रखने और लचीलापन बनाने में मदद करते हैं। उन्होंने कहा, "खेलों को जीवन का हिस्सा बनाना महत्वपूर्ण है।"प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि शैक्षणिक और शारीरिक रूप से मजबूत होना समग्र विकास की ओर ले जाता है। उन्होंने व्यावहारिक अध्ययन तकनीकों की भी सिफारिश की, जैसे कि केवल पढ़ने के बजाय लिखकर अभ्यास करना और उन साथियों की मदद करना जो पढ़ाई में संघर्ष कर रहे हैं, ताकि सीखने को और मजबूत किया जा सके।

श्री मोदी ने युवा नेताओं को निडरता विकसित करने और पहल करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने समझाया, "एक अच्छे नेता को अपने विचारों को स्पष्ट और प्रभावी ढंग से संप्रेषित करना चाहिए।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नेतृत्व का अर्थ कार्यों और समझ के माध्यम से दूसरों को प्रेरित करना है।

पर्यावरण देखभाल पर, प्रधानमंत्री ने छात्रों को प्राकृतिक संसाधनों के प्रति उनकी जिम्मेदारी की याद दिलाई। उन्होंने पानी के संरक्षण और पौधों के लिए जैविक कचरे के उपयोग जैसी सरल लेकिन प्रभावशाली पहलों की कहानियाँ साझा कीं। उन्होंने इन कार्यों को एक स्थायी और विकसित भारत के व्यापक दृष्टिकोण से जोड़ा।

प्रधानमंत्री ने रायपुर में स्थानीय संस्कृति और खान-पान पर छात्रों के साथ चर्चा की और भारत की समृद्ध विविधता को 'एक छात्र की तरह' समझने के लिए यात्रा को प्रोत्साहित किया। उन्होंने परीक्षा के तनाव को प्रबंधित करने और मानसिक कल्याण के लिए नींद और हंसी के महत्व को साझा किया।

गुजरात के देवमोगरा में, श्री मोदी ने आदिवासी छात्रों की प्रतिभा तथा वरली तथा पिथोरा जैसे चित्रकलाओं की प्रशंसा की। उन्होंने शिक्षा और बुनियादी ढांचे के माध्यम से आदिवासी क्षेत्रों के विकास के बारे में बात की और भारत की प्रगति में आदिवासी समुदायों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने शिक्षकों और उनके जीवन में उनकी रचनात्मक भूमिका के बारे में व्यक्तिगत किस्से भी सुनाए।

गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी के सुंदर दृश्यों के बीच प्रधानमंत्री को एक पारंपरिक 'गमोसा' भेंट किया गया। उन्होंने छात्रों के साथ गर्मजोशी से बातचीत करते हुए सलाह दी कि वे परीक्षाओं को डर के स्रोत के बजाय अवसर के रूप में देखें। उन्होंने आहार और जीवनशैली पर व्यक्तिगत राय साझा करते हुए सादगी और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।

इस चर्चा के दौरान श्री मोदी का संदेश एक समान रहा, परीक्षाएं जीवन की यात्रा का हिस्सा हैं और अनुशासन, आत्म-विश्वास तथा सहायक वातावरण के साथ छात्र चुनौतियों को पार कर सकते हैं तथा राष्ट्र में सार्थक योगदान दे सकते हैं। छात्रों ने अपना आभार और उत्साह व्यक्त किया तथा कई लोगों ने प्रधानमंत्री को एक दूर के नेता के बजाय परिवार के सदस्य एवं मित्र के रूप में वर्णित किया।

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