श्रीगंगानगर , जुलाई 22 -- राजस्थान में श्रीगंगानगर में स्थानीय ग्रामीणों की सहमति के बिना जिला प्रशासन के जबरन थोपे जा रहे ठोस कचरा निस्तारण संयंत्र के विरोध में तीन महीने से चले आ रहे शांतिपूर्ण आंदोलन बुधवार को दोपहर बाद अचानक उग्र हो गया।
ग्रामीणों की भारी भीड़ ने संयंत्र स्थल पर लगायी गयी तारबंदी, पिलर और लोहे के द्वारों को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया। यह घटना पिछले वर्ष हनुमानगढ़ जिले के राठीखेड़ा गांव में एशिया के सबसे बड़े निजी एथेनॉल संयंत्र को उखाड़ फेंकने वाली घटना की याद दिला गयी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार नरसिंहपुरा बारानी गांव में गौशाला के पास संयंत्र स्थल पर संघर्ष समिति ने आज जन महापंचायत का आयोजन किया था। महापंचायत में गंगनहर की एलएनपी नहर से लगते गांवों, ढाणियों और चकों से तीन हजार से अधिक ग्रामीण पहुंचे। कांग्रेस जिलाध्यक्ष एवं श्रीकरणपुर विधायक रूपेंद्रसिंह रूबी सहित कई नेता, जनप्रतिनिधि, सरपंच, पूर्व सरपंच, निदेशक, पूर्व निदेशक, संत-महात्मा और सिख निहंग भी मौजूद रहे।
महापंचायत में दोपहर तक भाषणों का सिलसिला चलता रहा। करीब सभी वक्ताओं ने संयंत्र लगाने के प्रशासनिक फैसले को गलत ठहराया और पर्यावरण, स्वास्थ्य और कृषि भूमि को होने वाले नुकसान पर गहरी चिंता जतायी। कुछ वक्ताओं ने संघर्ष को और सख्त करने का संकेत दिया जबकि एक-दो वक्ताओं ने खुलकर कहा कि किसी भी सूरत में संयंत्र नहीं लगने दिया जायेगा।
महापंचायत के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने संघर्ष समिति के पदाधिकारियों से वार्ता की। वार्ता में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रामेश्वरलाल, उपखंड अधिकारी राजेंद्रसिंह, तहसीलदार सूर्यप्रकाश स्वामी शामिल थे। बाद में वार्ता विफल हो गयी।
बाद में बताया गया कि अतिरिक्त जिला कलेक्टर सुभाष चौधरी पहुंच रहे हैं लेकिन काफी इंतजार के बावजूद वह नहीं पहुंचे। लंगर के बाद कई नेता वहां से चले गये। आधे घंटे के इंतजार के बाद महापंचायत की भारी भीड़ अचानक संयंत्र स्थल की ओर बढ़ गयी। पुलिस बल पहले से कच्चे मार्गों पर तैनात था लेकिन ग्रामीणों ने खेतों के रास्ते संयंत्र स्थल तक पहुंचकर प्रशासन को चौंका दिया।
अपराह्न करीब तीन बजे उग्र भीड़ ने तारबंदी, पिलर और द्वार उखाड़ना शुरू कर दिया। भीड़ में युवक, पुरुष, बच्चे, घूंघट निकाले महिलाएं और युवतियां शामिल थीं। नारेबाजी करते हुए देखते ही देखते सारी तारबंदी तहस-नहस कर दी गयी। ट्रैक्टरों की मदद से तारबंदी को दूर तक खींचकर फेंक दिया गया। मौके पर मौजूद करीब सौ पुलिसकर्मी और अधिकारी सिर्फ तमाशा देखते रहे। कोई प्रभावी रोकथाम नहीं की गयी।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक हरिशंकर यादव मौके पर पहुंचे। फिर पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। राष्ट्रीय राजमार्ग -62 पर जाम की आशंका को देखते हुए वहां भी भारी पुलिस बल तैनात किया गया, लेकिन ग्रामीणों ने राजमार्ग की ओर रूख नहीं किया।
सूत्रों के अनुसार सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में ग्रामीणों के खिलाफ मामला दर्ज किया जायेगा।
तीन महीने का शांतिपूर्ण आंदोलन अब उग्र रूप क्यों ले लिया है इसका कारण स्पष्ट है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने बिना उनकी सहमति के और बिना ग्राम पंचायत प्रस्ताव के संयंत्र थोपने की कोशिश की। पहले चक 6-जेड में प्रस्तावित संयंत्र का विरोध हुआ फिर नेतेवाला में स्थानांतरित किया गया। जहां केंद्र सरकार ने 78 करोड़ रुपये मंजूर किये और ठेका भी जारी हो चुका था। अब इसे नरसिंहपुरा बारानी में स्थानांतिरत किया गया है। ग्रामीण कहते हैं कि कचरा संयंत्र से आसपास की कृषि भूमि, पानी और हवा प्रदूषित हो जायेगी।
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