मोहाली , मार्च 16 -- पंजाब के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता बलबीर सिंह सिद्धू ने राज्य सरकार द्वारा 10 लाख नये राशन कार्ड जारी करने के निर्णय को महज एक चुनावी स्टंट करार दिया है। इसके साथ ही उन्होंने आशंका जताई कि चुनाव के बाद इन कार्डों का भी वही हश्र हो सकता है, जो पहले रद्द किये गये लाखों राशन कार्डों का हुआ था।

श्री सिद्धू ने कहा कि कुछ समय पहले राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि राज्य में लगभग 11 लाख राशन कार्ड रद्द कर दिये थे। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार अब यह कह रही है कि सरकारी नौकरी वाले सदस्य को छोड़कर हर परिवार को राशन कार्ड जारी किया जाएगा, तो फिर किन नियमों के तहत उन 11 लाख परिवारों को पहले अयोग्य घोषित किया गया था?उन्होंने सवाल उठाये कि क्या सरकारी लापरवाही के कारण उन परिवारों को उनके हक के अनाज से वंचित किया गया? क्या प्रभावित परिवारों को उस अवधि के दौरान छूटे हुए राशन का मुआवजा दिया जाएगा? क्या ये कार्ड स्थायी रूप से मान्य रहेंगे या चुनाव के कुछ महीनों बाद 'समीक्षा' के नाम पर फिरसे रद्द कर दिए जाएंगे?पूर्व मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में जन कल्याण सर्वोपरि होना चाहिए, लेकिन यह तभी सुनिश्चित हो सकता है, जब सरकारी नीतियों में स्थिरता और ईमानदारी हो, जिन गुणों की श्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार में कमी है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि अक्सर देखा जाता है कि चुनाव के करीब ऐसी लोकलुभावन योजनाओं की घोषणा की जाती हैं और चुनाव खत्म होते ही उन्हें बंद कर दिया जाता है। उन्होंने पुरजोर मांग की कि सरकार न केवल सभी रद्द किये गये राशन कार्डों को तुरंत बहाल करे, बल्कि उन गरीब परिवारों को उस अवधि के लिए अनाज या नकद मुआवजा भी दे, जिस दौरान उनका राशन बंद रहा था। उन्होंने अंत में कहा कि सच्चा जन कल्याण तभी दिखेगा, जब सरकार अपनी पिछली गलतियों को सुधारेगी और प्रभावित परिवारों को उनका अधिकार देगी, न कि केवल चुनाव जीतने के लिए कागजी कार्रवाई करेगी।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित