रायपुर , अगस्त 02 -- ) छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा है कि नये आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन में डिजिटल तकनीक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है और इसी उद्देश्य से इस राज्यस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया है।
यहां के एक होटल में रविवार को 'नवीन आपराधिक कानूनों के माध्यम से डिजिटल न्याय व्यवस्था को सशक्त बनाना' विषय पर राज्यस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में गृह विभाग, न्यायपालिका, अभियोजन, फॉरेंसिक विभाग तथा राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी ) के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
इस मौके पर श्री शर्मा ने कहा कि कि राज्य सरकार पूरे क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में सीसीटीएनएस , ई-साक्ष्य तथा न्याय श्रुति जैसी डिजिटल व्यवस्थाएं पहले से संचालित हैं। अब इन सभी प्रणालियों को आपस में जोड़कर पुलिस, अभियोजन, फॉरेंसिक और न्यायपालिका के बीच समन्वय को और अधिक मजबूत किया जाएगा। इससे न्यायिक प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, त्वरित और प्रभावी बनेगी तथा इसके अभूतपूर्व परिणाम सामने आएंगे।
गृह मंत्री ने कहा कि यह पहली बार है जब गृह विभाग और न्यायपालिका के अधिकारी एक ही मंच पर उपस्थित हुए हैं। कार्यशाला में उच्च न्यायालय के सभी न्यायमूर्ति, अभियोजन विभाग के अधिकारी, फॉरेंसिक विशेषज्ञ तथा एनसीआरबी की टीम ने भी भागीदारी की। उन्होंने कहा कि विभिन्न संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानूनों में डिजिटल व्यवस्था को विशेष महत्व दिया गया है। पारंपरिक चालान प्रणाली के स्थान पर ई-चालान लागू किया जा चुका है। इसके साथ ही ई-फॉरेंसिक प्रणाली के माध्यम से फॉरेंसिक रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाएगी तथा अदालतों में ई-चार्जशीट प्रस्तुत की जाएगी। वहीं न्याय श्रुति प्रणाली के जरिए न्यायाधीश डिजिटल माध्यम से न्यायिक कार्यवाही को और अधिक सुव्यवस्थित ढंग से संचालित कर सकेंगे।
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