पुणे , जून 21 -- महाराष्ट्र सूचना आयोग के नये नियमों में शामिल प्रावधान के खिलाफ आपत्ति जतायी गयी है, जिसमें अपीलकर्ता या शिकायतकर्ता की सहायता करने वाले व्यक्ति के वकील नहीं होने की शर्त रखी गयी है।

पुणे बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अधिवक्ता मिलिंद दत्तात्रेय पवार ने रविवार को कहा कि महाराष्ट्र सूचना आयोग नियमावली के नियम 20(3) से नागरिकों के अधिकारों और अधिवक्ताओं के पेशेवर हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम से जुड़े मामलों में अक्सर जटिल कानूनी और प्रक्रियागत प्रश्न होते हैं, ऐसे में कई मामलों में कानूनी सहायता आवश्यक होती है। नागरिकों को अपनी पसंद के अधिवक्ता या कानूनी प्रतिनिधि के माध्यम से पक्ष रखने से रोकना न्याय और निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांतों के विपरीत है।

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