नयी दिल्ली , जनवरी 22 -- देश में निर्यात एसोसिएशनों के महासंघ फियो ने नयी घरेलू विनिर्माण इकाइयों के लिए 15 प्रतिशत के रियायती कार्पोरेट कर की दर कम से कम पांच साल और बढ़ाये जाने की सिफारिश की है।

आय कर की धारा 115 बीएबी के तहत लागू इस रियायत की पिछली कट ऑफ तारीख 31 मार्च, 2024 है।

फियो के अध्यक्ष एस सी रल्हन ने केंद्रीय बजट 2026 के लिए संगठन की ओर से प्रस्तुत सुझावों के बारे में गुरुवार को एक प्रेस नोट में इसका औचित्य बताते हुए कहा, ' ऐसे समय में जब भारत वैश्विक विनिर्माण, निवेश और आपूर्ति-श्रृंखला की कड़ियों को दूसरी जगहों से आकर्षित करने के लिए ज़ोरदार प्रतिस्पर्धा में लगा है, इस रियायती कॉरपोरेट कर व्यवस्था के खत्म होने से विनिर्माण कार्य की जगह के तौर पर देश का आकर्षण कम हो जाता है।"उन्होंने कहा कि इस योजना को बढ़ाने से नीति-निश्चितता मजबूत होगी, निवेश पर कर के बाद लाभ बेहतर होगा और सरकार के मेक इन इंडिया और निर्यात -आधारित वृद्धि के उद्देश्यों को मज़बूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह कदम नए पूंजी निवेश, रोज़गार सृजन और उच्च मूल्य-वर्धित विनिर्माण को प्रोत्साहित करेगा और उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना ( पीएलआई) के पूरक का काम करेगाफियो ने सीमा शुल्क क्षेत्र में उल्टी व्यवस्था को भी आगामी बजट में दूर किये जाने की सिफारिश की है जहां विनिर्माण सामग्री और साधनों पर शुल्क विनिर्मित माल से ज्यादा पड़ रहे हैं । फियो अध्यक्ष ने कहा , ' ऐसे उल्टे शुल्क की समस्या पर तुरंत ध्यान देना चाहिए... फियो निर्यात पर ध्यान देने वाली इकाइयों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले मुख्य साधनों और सामग्री पर सीमा शुल्क को तर्कसंगत बनाने और कम करने की सिफारिश करता है ताकि साधन की लागत तैयार उत्पाद पर शुल्क के साथ संगत हो जाए।

फियो ने सिंथेटिक यार्न और फाइबर , पीसीबी, कनेक्टर और सब-असेंबली , रसायन और प्लास्टिक सेक्टर में, प्राथमिक कच्चे माल और पॉलीमर , लेदर और फुटवियर क्षेत्र में इस तरह की समस्याओं का उल्लेख किया है।

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