चंडीगढ़ , जून 01 -- हरियाणा सरकार ने गुरुग्राम में अपनी प्रमुख 'मेक इन हरियाणा' नीति के साथ नौ नयी क्षेत्रीय औद्योगिक नीतियों का शुभारंभ किया। नीतियों की शुरुआत के तुरंत बाद राज्य को विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 1.10 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनमें करीब 30,000 करोड़ रुपये के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) परियोजनाएं शामिल हैं।
कार्यक्रम में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, निवेशकों, एमएसएमई, स्टार्टअप्स, विदेशी प्रतिनिधिमंडलों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा औद्योगिक विकास के अगले चरण के लिए पूरी तरह तैयार है और सरकार निवेशकों को बेहतर सुविधाएं, तेज प्रशासनिक प्रक्रियाएं तथा मजबूत आधारभूत ढांचा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
नयी नीतियों का उद्देश्य विनिर्माण, इलेक्ट्रिक वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य प्रसंस्करण, डेटा सेंटर, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और अन्य उभरते क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य में पहली बार सभी क्षेत्रों के लिए वित्तीय प्रोत्साहन लागू किए गए हैं। उद्योगों को परियोजना लागत पर30 प्रतिशत तक पूंजी सहायता, नेट एसजीएसटी प्रतिपूर्ति, अनुसंधान एवं विकास के लिए 50 करोड़ रुपये तक सहायता तथा निर्यात आधारित प्रोत्साहन दिये जाएंगे।
सरकार ने एआई-सक्षम 'सिंगल विंडो 2.0' प्रणाली का भी शुभारंभ किया, जिससे निवेशकों को भूमि चयन, अनुमोदन प्रक्रिया और प्रोत्साहन संबंधी जानकारी एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में 1.10 लाख करोड़ रुपये के निवेश समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया गया। सरकार का दावा है कि इन निवेशों से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे और राज्य के औद्योगिक विकास को नयी गति मिलेगी।
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