बेंगलुरु , जनवरी 13 -- कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार कर्नाटक नफरती भाषण विधेयक और नफरत का अपराध (रोकथाम) विधेयक, 2025 पर राज्यपाल थावरचंद गहलोत को कोई भी स्पष्टीकरण देने के लिए तैयार है।
श्री परमेश्वर ने यहां मीडिया से कहा कि सरकार पहले ही विधेयक पर स्पष्टीकरण दे चुकी है और अगर राजभवन को फिर से जरूरत महसूस हुई तो उनके सवालों का जवाब देने को तैयार है।
गौरतलब है कि यह विवादास्पद कानून दिसंबर, 2025 में बेलगावी में राज्य विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के दौरान पास हुआ था। यह कानून नफरती भाषण और अन्य संबंधित अपराधों को जेल और जुर्माने के प्रावधानों के साथ आपराधिक बनाने की कोशिश करता है। इसके प्रस्तावित ढांचे के तहत नफरती भाषण और नफरत का अपराध को गैर-जमानती अपराध माना जाएगा, जिसके लिए पहली बार और बार-बार अपराध करने वालों को जेल और जुर्माने की सजा दी जाएगी।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (सेक्युलर) सहित विपक्षी पार्टियों ने राज्यपाल से विधेयक को मंजूरी नहीं देने का आग्रह किया है।
भाजपा नेताओं ने इस विधेयक को 'कठोर' और बोलने की आजादी के खिलाफ बताया है। उन्होंने राज्यपाल को यह कहते हुए ज्ञापन सौंपा है कि इसका दुरुपयोग राजनीतिक विरोधियों और मीडिया संगठनों के खिलाफ किया जा सकता है। उन्होंने राज्यपाल से इस विधेयक को संविधान के तहत राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित करने की भी मांग की है। जद)एस) ने भी राज्यपाल से इसकी मंजूरी को रोकने की अपील करते हुए तर्क दिया है कि यह कानून अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को अनुचित रूप से प्रतिबंधित करता है।
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