जयपुर , सितंबर 21 -- राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव में बेईमानी और बेशर्मी की सारी हदें पार कर देने का आरोप लगाया हैं।

श्री गहलोत ने अपने बयान में यह आरोप लगाते हुए कहा कि नगरीय निकायों में अपने बोर्ड बनाने के लिए सारी मर्यादाओं और नियम-कानूनों को भाजपा सरकार ने तार-तार कर दिया। पूरा प्रदेश स्तब्ध है, राजस्थान में कभी ऐसा होगा यह सोचा भी नहीं जा सकता था। भाजपा सरकार ने सरकारी मशीनरी, पुलिस और पूरा प्रशासन लगाकर लोकतंत्र की खुलेआम लूट की है। शायद ही कोई निकाय बचा हो जहां भाजपा ने सत्ता और धनबल के दम पर जनमत को कुचलने का प्रयास न किया हो।

उन्होंने राजस्थान में एक-एक पार्षद के लिए 2-2 करोड़ रुपये तक की बोली लगायी जाने का आरोप भी लगाया। कांग्रेस पार्षदों को कभी उनके घर को अवैध बताकर नोटिस भेजा गया, कभी उनके प्रतिष्ठानों को सील किया गया, नये-नये मुकदमे दायर कर पुलिस के सामने पेश होने के नोटिस थमाये गये, बाड़ेबंदी में रुके पार्षदों के कैंप में पुलिस भेजकर उन्हें जबरन उठाया गया। भाजपा सरकार के इन कृत्यों के कारण कल रात 12 बजे तक राजस्थान उच्च न्यायालय को सुनवाई कर चुनाव से जुड़ी याचिकाओं का निस्तारण करना पड़ा, जिसमें भाजपा सरकार को अदालत से करारा तमाचा लगा।

श्री गहलोत ने कहा कि यह सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं रहा, उत्तर प्रदेश और हरियाणा की पुलिस के जरिए भी यहां के निर्वाचित पार्षदों को भाजपा के पक्ष में ले जाने का काम किया गया। अब तक जिस तरह की खरीद-फरोख्त और एजेंसियों के दुरुपयोग की तस्वीरें हम पश्चिम बंगाल में देख रहे थे, वही खेल अब राजस्थान के अपने निकाय चुनावों में खुलकर सामने आ गया है।

उन्होंने कहा कि आज नगरीय निकाय चुनाव के दिन भी मथानिया, पावटा, तिजारा, कुचेरा, हनुमानगढ़, गंगानगर, अलवर, निम्बाहेड़ा समेत पूरे राजस्थान से जो दृश्य सामने आए, वे चीख-चीखकर लोकतंत्र की हत्या की गवाही दे रहे हैं। जब नगरीय निकाय चुनावों में यह हाल है, तो साफ है कि आने वाले पंचायत चुनावों में भाजपा सरकार इससे भी आगे जाकर सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर सकती है।

उन्होंने कहा "मुख्यमंत्री भजनलालजी, आपसे प्रदेश को ऐसे कृत्यों की उम्मीद नहीं थी। अब आपका और आपकी सरकार का नाम राजस्थान के इतिहास में लोकतंत्र की हत्या करने वाले मुख्यमंत्री और सरकार के रूप में दर्ज हो चुका है। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि राजनीतिक मामलों में काफी हद तक निष्पक्ष माने जाने वाले राजस्थान के नौकरशाह और पुलिस के कई अधिकारी भी पहली बार भाजपा सरकार के साथ मिलकर इस काम में शामिल हो गए।"उन्होंने कहा कि संविधान की शपथ लेने वाले अधिकारियों को विचार करना चाहिए कि क्या ऐसे कृत्यों में शामिल होने के लिए वे राजकीय सेवा में आये थे। समय आने पर हर एक की जवाबदेही तय होगी ताकि भविष्य में ऐसी शर्मनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

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