यमुनानगर , अगस्त 12 -- हरियाणा में यमुनानगर के नगरपालिका कर्मचारी संघ, अग्निशमन विभाग कर्मचारी यूनियन की हड़ताल यमुनानगर दमकल केंद्र पर सातवें दिन भी जारी रही।
श्री विजेंद्र सिंह की अध्यक्षता में हड़ताल का संचालन जिला सचिव रिंकू कुमार ने किया। अग्निशमन यूनियन के राज्य महासचिव गुलशन भारद्वाज ने बताया की फायर की राज्य कार्यकारिणी की बैठक बीते कल सुखपुरा चौक स्थित कर्मचारी भवन में हुई। बैठक में सर्वसम्मति से चल रही हड़ताल को 15 अगस्त तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
बैठक में निर्णय लिया गया कि 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ध्वजारोहण के बाद विचार गोष्ठी आयोजित की जाएगी। गोष्ठी में राजनीतिक एवं सामाजिक नेताओं, जनप्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों, कर्मचारी एवं मजदूर संगठनों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं को आमंत्रित किया जाएगा। गोष्ठी में आजाद भारत में फायर कर्मचारियों के साथ किये जा रहे व्यवहार और उनकी लंबित मांगों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। पन्द्रह अगस्त को ही हड़ताल को आगे बढ़ाने अथवा अन्य कदम उठाने पर फैसला किया जाएगा।
श्री भारद्वाज ने बताया कि 17 अगस्त से नगरपालिका कर्मचारी संघ एवं फायर कर्मचारी यूनियन विधायकों, मंत्रियों एवं सांसदों, विभिन्न राजनीतिक दलों के एवं जिला अध्यक्षों तथा नगरपालिका, नगर परिषद एवं नगर निगमों के सदन के सदस्यों, अध्यक्षों एवं महापौरों आपको ज्ञापन सौंपकर नगरपालिका एवं फायर कर्मचारियों के आंदोलन का समर्थन करने तथा सरकार से मांगों का समाधान करवाने की अपील करेगा।
उन्होंने कहा कि संगठन दलित सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों से भी सफाई कर्मचारियों के आंदोलन का समर्थन करने की अपील करेगा। धरने को सम्बोधित करने पहुंचे सर्व कर्मचारी संघ जिला प्रधान महिपाल सौदे, नन्द लाल,रिटायर्ड कर्मचारी संघ जिला सचिव सोमनाथ, ब्लॉक प्रधान अशोक वर्मा, सचिव जरनैल चिनालिया ने सरकार पर 13 मई के समझौते से पीछे हटने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार फायर कर्मचारियों के साथ धोखा किया है।
उन्होंने कहा कि 13 मई की वार्ता में फायर विभाग के शहीद कर्मचारियों के परिवारों को 50-50 लाख रुपये आर्थिक सहायता एवं पक्की नौकरी, फायर विभाग के अनुबंधित ड्राइवरों एवं फायरमैनों को पक्का करने तथा वर्दी भत्ता, जोखिम भत्ता सहित आठ मांगों पर सहमति बनी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बाद में 22 मई को माननीय उच्च न्यायालय में दिये गये शपथ पत्र में पूर्व में मानी गयी मांगों से इनकार कर दिया। सरकार के इस रवैये से कर्मचारियों एवं आम जनता में सरकार के प्रति विश्वास समाप्त हुआ है।
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