रायपुर , जनवरी 30 -- छत्तीसगढ़ में नारायणपुर जिले के दूरस्थ और नक्सल प्रभावित वनांचलों को मुख्यधारा से जोड़ने की महत्वाकांक्षी योजना 'मुख्यमंत्री बस सेवा' की बसें जिले की सड़कों पर दौड़ने लगी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शुक्रवार को बस यात्रियों से संवाद करके उनके यात्रा संबंधी अनुभवों को जाना। साथ ही मुख्यमंत्री विष्णुदेव ने बस बैठकर में चार किलोमीटर की यात्रा करके सड़क और बस की सेवा का जायजा भी लिया।
मुख्यमंत्री ने बस में सफर करने वाले यात्रियों से इस सेवा के शुरू होने के बाद हो रहे लाभ और सुविधाओं के बारे में सीधे तौर पर चर्चा की। उनका यह सीधा संवाद और अनुभव योजना की विश्वसनीयता एवं जनकेंद्रित दृष्टि को रेखांकित करता है। इस कदम को नारायणपुर जिले में विकास, विश्वास और सुशासन के एक सशक्त प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।
जिले में इस सेवा के तहत चार बसें चलाई जा रही हैं, जिनमें से तीन नियमित मार्गों पर संचालित हैं। ये सेवाएं उन क्षेत्रों में एक दशक से अधिक समय बाद सार्वजनिक परिवहन का पहला प्रमुख साधन बनी हैं, जो पहले नक्सलवाद की चपेट में रहे थे।
पहला मार्ग नारायणपुर से नेलंगूर का है, जिससे डूमरतराई, कुकडाझोर, आंकाबेडा, कस्तूरमेटा, मोहंदी, कोडलियार, कुत्तूल, बेडमाकोटी और नेलंगूर गांव जुड़ रहे हैं। दूसरा मार्ग नारायणपुर से कुतूल का है, जो कच्चापाल, कोडलियार, कुरूषनार, बासिंग, कुन्दला, कोहकामेटा और इरकभट्टी को लाभान्वित कर रहा है। तीसरा मार्ग नारायणपुर से गारपा का है, जिस पर कुरूषनार, बासिंग, कुन्दला, सोनपुर, मसपुर और होरादी गांवों के लोग यात्रा कर रहे हैं।
यह परिवहन सेवा सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल पर चल रही है, जहां संचालन की जिम्मेदारी एक निजी ऑपरेटर को दी गई है, जबकि मार्ग निर्धारण और निगरानी का कार्य सरकार कर रही है। इस पहल का प्रमुख उद्देश्य सीमांत जनजातीय समुदायों को विश्वसनीय, सुरक्षित एवं सुलभ परिवहन सुविधा प्रदान करना, सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देना और पूरे क्षेत्र की कनेक्टिविटी को मजबूत बनाना है।
यह सेवा न केवल दैनिक आवागमन को आसान बना रही है, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं तक पहुंच को भी सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभा रही है।
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