नारायणपुर , मार्च 16 -- छत्तीसगढ़ में नक्सल प्रभावित जिलों के भीतरी इलाकों में प्राथमिक स्कूलखुलने लगे है।
अबूझमाड़ के अति दूरस्थ गांव कारकाबेड़ा के बच्चों को आजादी के बाद पहली बार औपचारिक शिक्षा की राह खुली है। कलेक्टर नम्रता जैन के निर्देश पर यहां प्राथमिक शाला खोली गई, जिससे पूरे गांव में खुशी का माहौल है। जिला प्रशासन की इस पहल से विकास की मुख्यधारा से दूर इस बस्ती के बच्चों को अब स्कूल जाने का अवसर मिल सकेगा। जिले के अबूझमाड़ इलाके में नक्सलियों के हथियारों की फैक्टरी हुआ करती थी। एक वक्त था जब यह नक्सलियों का अभेद्य किला माना जाता था। राज्य सरकार की पुनर्वास नीति और सुरक्षा बलों की शक्ति के कारण नक्सलवाद समाप्ति के कगार पर है।
जिला पीआरओ से आज (सोमवार) मिली जानकारी के अनुसार,कलेक्टर नम्रता जैन एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आकांक्षा खलको के मार्गदर्शन में अबूझमाड़ के कोड़ेनार में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में ग्रामीणों ने स्कूल खोलने की मांग की थी। इस मांग को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार पटेल को तत्काल इस दिशा में कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद संकुल समन्वयक एवं शिक्षकों की टीम ने ग्राम कारकाबेड़ा का सर्वेक्षण किया, जिसमें 20 बच्चे शिक्षा के योग्य पाए गए।
सर्वे रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर के पुनः निर्देश पर खंड शिक्षा अधिकारी संतुराम नूरेटी, खंड स्रोत समन्वयक लक्ष्मीकांत सिंह, संकुल समन्वयक कारूराम नूरेटी, सरपंच रामूराम वड्डे तथा शिक्षकों की टीम ने कई नदी-नालों और पहाड़ियों को पार करते हुए लगभग पांच घंटे की पैदल यात्रा के बाद कारकाबेड़ा पहुंचकर नवीन प्राथमिक शाला का शुभारंभ किया।
स्कूल प्रारंभ होने के साथ ही बच्चों को निःशुल्क गणवेश, पाठ्यपुस्तक, स्लेट, पेंसिल, श्यामपट्ट सहित अन्य शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराई गई। वर्तमान में इस स्कूल में गांव के 20 बच्चों को शिक्षा दी जाएगी, जिसके लिए जिला प्रशासन ने एक अतिथि शिक्षक की भी व्यवस्था की है। भविष्य में आसपास के मरकूड़ जैसे गांवों के बच्चे भी इस स्कूल का लाभ उठा सकेंगे।
स्कूल खुलने से ग्रामीणों में काफी उत्साह है। ग्रामीणों ने कलेक्टर और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके बच्चे अब पढ़-लिखकर आगे बढ़ सकेंगे। जिला प्रशासन की यह पहल न केवल कारकाबेड़ा के लिए वरन पूरे अबूझमाड़ क्षेत्र में शिक्षा के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
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