सुकमा , मई 03 -- छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में कोंटा विकासखंड के अंतिम छोर पर स्थित गोगुण्डा पंचायत, जो कभी नक्सलवाद के कारण भय और अलगाव का पर्याय थी, अब विकास और बदलाव की नई मिसाल पेश कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में क्षेत्र में नक्सली प्रभाव कम होने के बाद शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं अब तेजी से धरातल पर उतर रही हैं।
जिला प्रशासन द्वारा गोगुण्डा पंचायत एवं आश्रित ग्राम मीचिगुड़ा में लगभग एक करोड़ रुपये के विकास कार्य स्वीकृत किए गए हैं, जिससे करीब 1,642 ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाओं का सीधा लाभ मिलने लगा है। कलेक्टर अमित कुमार एवं जिला पंचायत सीईओ मुकुन्द ठाकुर के मार्गदर्शन में पंचायत में पीडीएस भवन, स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों के साथ-साथ एक आधुनिक मनोरंजन कक्ष का निर्माण भी कराया जा रहा है।
इस मनोरंजन कक्ष में बड़ी स्क्रीन वाली टीवी की व्यवस्था की जाएगी, जिससे ग्रामीण पहली बार सामूहिक रूप से फिल्में, खेल और समाचार देख सकेंगे। यह पहल ग्रामीणों को देश-दुनिया की जानकारी से जोड़ने और उनके सामाजिक जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
आर्थिक मोर्चे पर भी गोगुण्डा ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। वन विभाग के समन्वय से 27 अप्रैल से पंचायत में पहली बार तेंदूपत्ता खरीदी शुरू की गई है। इस पहल से लगभग 200 कार्डधारी परिवारों को स्थानीय स्तर पर सीधा रोजगार मिला है। अब ग्रामीण बिना किसी भय के तेंदूपत्ता संग्रहण कर रहे हैं और उन्हें उचित मूल्य प्राप्त हो रहा है, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी यहाँ एक विशेष मिसाल कायम हुई है। 'फड़ मुंशी' के रूप में मुचाकी गंगी की नियुक्ति ने महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित किया है। अब स्थानीय महिलाएं आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं और गाँव के निकट ही रोजगार मिलने से उनकी वित्तीय स्थिति सुदृढ़ हो रही है।
हाल ही में गाँव में बिजली पहुँचने से ग्रामीणों के जीवन स्तर में व्यापक बदलाव आया है। अब वे पारंपरिक संसाधनों पर निर्भरता छोड़कर शासन की योजनाओं के माध्यम से विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।
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