नारायणपुर , नवंबर 16 -- छत्तीसगढ़ में नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ को मुख्यधारा से जोड़ने तथा 'नक्सल मुक्त सशक्त बस्तर' की दिशा में नारायणपुर पुलिस की ओर से किए जा रहे प्रयासों को एक और बड़ी सफलता मिली है तथा ऐसा लगता है कि यहां भी नक्सली सिमटते जा रहे हैं।
'माड़ बचाव अभियान' के तहत पुलिस, डीआरजी और आईटीबीपी 44वीं बटालियन ने थाना ओरछा क्षेत्र के घोर नक्सल प्रभावित ग्राम धोबे में सुरक्षा एवं जन-सुविधा कैंप की स्थापना की है। इस कैंप के शुरू होने से क्षेत्र में सुरक्षा, सड़क निर्माण और मूलभूत सुविधाओं का नया विस्तार होगा।
जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय से रविवार को मिली जानकारी के मुताबिक,पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज पी. सुन्दराज एवं वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में अबूझमाड़ में लगातार नए कैंप स्थापित किए जा रहे हैं ताकि सड़क, पुल-पुलिया, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और मोबाइल नेटवर्क जैसी आवश्यक सुविधाएं अंदरूनी गांवों तक पहुंच सकें। ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने से विकास कार्यों में तेजी आई है और स्थानीय लोगों का प्रशासन पर भरोसा बढ़ रहा है।
इसी क्रम में 15 नवंबर 2025 को पुलिस ने ग्राम धोबे में नया कैंप स्थापित किया। यह क्षेत्र माओवादियों का पुराना आश्रयस्थल रहा है। नई सुरक्षा व्यवस्था से ग्रामीणों में उत्साह का माहौल बना है। कैंप की भौगोलिक स्थिति भी रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है यह थाना ओरछा से 23 किमी, आदेर से 20 किमी, कुड़मेल से 10 किमी और जाटलूर से केवल पांच किमी दूरी पर स्थित है।
कैंप स्थापित होने के बाद अब इस क्षेत्र में सड़क निर्माण, पुल-पुलिया, स्कूल, अस्पताल और मोबाइल नेटवर्क जैसी सुविधाओं का विस्तार तेज़ी से होगा। पुलिस सुरक्षा के चलते अब सड़क कार्य और अन्य विकास योजनाओं का निष्पादन बिना रुकावट जारी रखा जा सकेगा।
नारायणपुर पुलिस ने वर्ष 2025 में अब तक नक्सलियों की कथित राजधानी कुतुल समेत कोडलियर, बेडमाकोटी, पदमकोट, कान्दुलपार, नेलांगूर, पांगूड, रायनार, एडजुम, ईदवाया, आदेर, कुड़मेल, कोंगे, सितरम, तोके, जाटलूर और अब धोबे में कुल 17 नए कैंप खोलकर नक्सलियों की पकड़ कमजोर कर दी है।
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