नयी दिल्ली , फरवरी 04 -- गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को कहा कि पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार नक्सलवाद को राज्यों की समस्या समझती थी और वोट बैंक के लिए समझौते करती थी जिसके कारण देश से नक्सलवाद समाप्त नहीं हो रहा था।

श्री राय ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न के उत्तर में कहा कि मौजूदा सरकार मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद मुक्त करने के लक्ष्य के प्रति कृतसंकल्प है। इसके लिए कई प्रभावी कदम उठाये गये हैं।

उन्होंने कहा कि "साल 2014 से पहले की सरकार" समझती थी कि यह राज्यों की समस्या है। वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ कोई नीति नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया, "वोट (बैंक) की राजनीति के लिए कुछ राजनीतिक दल केंद्र और राज्य में हिंसावादी दलों के साथ समझौते करते रहे।"मंत्री ने बताया कि नक्सलवाद के उन्मूलन के लिए मौजूदा सरकार ने छह योजनाएं शुरू की हैं जिन पर अबतक 10,556 करोड़ रुपये खर्च किये गये हैं। नक्सल प्रभावित इलाकों में सीआरपीएफ की 995 कंपनियां तैनात की गयीं और 706 किले बंदी पुलिस थाने बनाये गये। इन इलाकों के विकास के लिए बीस हजार करोड़ रुपये की लागत से 17,573 किमी सड़क निर्माण किया गया। दस हजार मोबाइल टावर लगाये गये, बैंकों की शाखाएं, एटीएम और स्कूल खोले गये।

श्री राय ने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि साल 2010 में नक्सलवाद के कारण 1,005 लोगों की मौत हुई थी, यह संख्या 2025 में घटकर 100 रह गयी। इस दौरान हिंसक घटनाओं की संख्या 1,936 से घटकर 234 रह गयी। साल 2010 में दस राज्यों के 126 जिलों में 465 थाना क्षेत्र नक्सलवाद से प्रभावित थे। अब यह तीन राज्यों के आठ जिलों में 119 थाना क्षेत्रों तक सिमट कर रह गया है। जून 2019 से अब तक 33 शीर्ष नक्सलियों समेत 1,149 वामपंथी कैडर मारे गये हैं, 7,409 गिरफ्तार किये गये हैं और 5,880 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किये हैं।

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