कांकेर , अक्टूबर 29 -- छत्तीसगढ़ और झारखंड समेत कई राज्यों में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियानों ने सीपीआई (माओवादी) संगठन को गहरी चोट पहुँचाई है। संगठन का शीर्ष नेतृत्व तेजी से सिकुड़ रहा है, जबकि सरकार द्वारा आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास और नक्सल-प्रभावित क्षेत्रों के विकास पर जोर दिया जा रहा है।
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक पी सुन्दराज ने बताया कि वर्ष 2024 में पोलित ब्यूरो और सेंट्रल कमेटी के 45 सदस्य थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर 6-7 रह गई है। इस अवधि में 9 शीर्ष नक्सलियों को मुठभेड़ों में ढेर किया गया, जबकि सेंट्रल कमेटी की दो सदस्यों, सुजाता और चंद्रना, ने तेलंगाना में आत्मसमर्पण किया है। इंटर-स्टेट पुलिसिंग और आपूर्ति नेटवर्क के ध्वस्त होने से संगठन की कार्यक्षमता प्रभावित हुई है।
कांकेर जिले में 21 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था, जिन्हें राज्य की पुनर्वास नीति के तहत पहली किश्त के रूप में 10,000 रुपये आज दिए गए हैं। 13 महिला नक्सली एवं 8 पुरुष नक्सली 18 हथियारों के साथ मुख्य धारा में आए हैं।
कलेक्टर नीलेश कुमार महादेव क्षीरसागर ने बताया, "आत्मसमर्पण करने वालों के कौशल विकास पर काम चल रहा है। साथ ही, 15,000 आवासों के निर्माण कार्य प्रगति पर हैं, जिनमें से 36 हितग्राहियों को आवास आवंटित किए जा चुके हैं।" उन्होंने कहा कि नक्सल पीड़ितों को लाभ पहुँचाने में कुछ औपचारिकताओं की बाधाएँ आ रही हैं, जैसे पलायन के दस्तावेजी सबूतों का अभाव।
शहीद परिवारों के लिए अनुकंपा नियुक्तियों के मामले भी प्रशासन की प्राथमिकता में हैं, हालाँकि कुछ मामले नाबालिग परिजनों या उच्च शिक्षा के कारण लंबित हैं।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित