बैतूल , जून 09 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में नकदी की कमी के कारण व्यापारिक गतिविधियां और कृषि उपज मंडी का कारोबार प्रभावित हो रहा है। व्यापारियों को बड़ी राशि की निकासी के लिए कई दिन पहले बैंक को सूचना देनी पड़ रही है, जबकि भुगतान प्राप्त करने में भी विलंब हो रहा है।
व्यापारियों के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में चेक अथवा निकासी प्रपत्र प्रस्तुत करने के बाद तत्काल भुगतान मिल जाता था, लेकिन वर्तमान में बैंकों द्वारा बड़ी राशि के भुगतान के लिए अग्रिम सूचना देना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके बावजूद नकदी उपलब्ध होने में दो से तीन दिन का समय लग रहा है।
नकदी संकट का सबसे अधिक असर कृषि उपज मंडी पर देखा जा रहा है। मंडी में उपज खरीदने वाले व्यापारियों के पास पर्याप्त नकदी नहीं होने से किसानों को नकद भुगतान के स्थान पर आरटीजीएस और अन्य डिजिटल माध्यमों से भुगतान किया जा रहा है। दो लाख रुपये से अधिक की उपज बेचने वाले किसानों को विशेष रूप से डिजिटल भुगतान किया जा रहा है।
किसानों का कहना है कि खरीफ सत्र की तैयारियों के बीच उन्हें खाद, बीज और अन्य कृषि कार्यों के लिए नकदी की आवश्यकता रहती है। ऐसे में डिजिटल भुगतान मिलने के बावजूद तत्काल नकद जरूरतों को पूरा करने में कठिनाई हो रही है।
पूर्व व्यापारी प्रतिनिधि एवं कृषि उपज मंडी से जुड़े प्रमोद अग्रवाल ने बताया कि बड़ी राशि की निकासी के लिए दो से चार दिन पूर्व बैंक को सूचना देनी पड़ती है, जिसके बाद ही भुगतान संभव हो पाता है। इसी कारण मंडी में किसानों को बड़े भुगतान डिजिटल माध्यमों से किए जा रहे हैं।
बैंक अधिकारियों का कहना है कि खरीफ सत्र, व्यापारिक गतिविधियों और अन्य आवश्यकताओं के चलते नकदी की मांग सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ गई है। उनका कहना है कि यह स्थिति केवल बैतूल तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी देखने को मिल रही है।
भारतीय स्टेट बैंक की बैतूल शाखा के प्रबंधक कपिल येवले ने बताया कि उच्च स्तर पर नकदी आपूर्ति में कुछ बाधाओं के कारण स्थानीय शाखाओं को सीमित संसाधनों के अनुरूप भुगतान प्रबंधन करना पड़ रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नकदी आपूर्ति सामान्य होने पर स्थिति में सुधार होगा।
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