नैनीताल , सितंबर 02 -- मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने उत्तराखंड में ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण नियमावली का प्रभावी अनुपालन को लेकर दायर जनहित याचिका पर बुधवार को सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को सरकार द्वारा दाखिल जवाबी हलफनामा के बदले प्रति-शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

अल्मोड़ा निवासी जितेंद्र यादव की ओर से दायर जनहित याचिका पर सरकार की ओर से बुधवार को जवाबी हलफनामा दायर किया गया। सरकार की ओर से कहा गया कि वाहनों में लगे तेज आवाज वाले एम्पलीफायरों और साइंलेंसर पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में शांत, आवासीय जोन घोषित किए गए हैं। हालांकि याचिकाकर्ता की ओर से सरकार के जवाब से असहमति जताते हुए कहा गया कि सरकार इस मामले में खानापूर्ति कर रही है। अंत में खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को लिखित जवाब पेश करने के निर्देश दे दिए।

वर्ष 2025 में दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि अदालत के स्पष्ट आदेश के बावजूद सरकार ध्वनि प्रदूषण नियमों का अनुपालन करवाने में नाकाम रही है। जमीनी स्तर पर इसका पालन नहीं हो रहा है।

याचिकाकर्ता के अनुसार राज्य सरकार ने शांत और आवासीय जोन की अधिसूचना तो जारी कर दी है लेकिन उचित सीमांकन एवं वर्गीकरण अब तक नहीं किया गया है।

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