नैनीताल , जुलाई 21 -- उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (उपपा) के केन्द्रीय अध्यक्ष प्रभात ध्यानी के दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की आशंका के चलते हिरासत में लिए जाने के मामले में उच्च न्यायालय मंगलवार को प्रदेश सरकार के जवाब से संतुष्ट नजर नहीं आयी और सरकार को कड़ी फटकार लगाई।
न्यायमूर्ति रवीद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि राज्य की कार्रवाई प्रथम दृष्टया "गुंडागर्दी" के समान प्रतीत होती है। खंडपीठ ने साफ कर दिया है कि वह इस मामले को आसानी से छोड़ने वाली नहीं है और यह मामला सरकार के लिए गले की फांस बन सकता है।
अदालत ने राज्य सरकार के अलावा अन्य पक्षकारों को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
मामला उपपा प्रमुख के 19 जुलाई को ऋषिकेश रेलवे स्टेशन पर पुलिस हिरासत से जुड़ा है। दरअसल श्री ध्यानी ने फेसबुक पर जंतर-मंतर पर चल रहे सोनम वांगचुक के समर्थन में पोस्ट डालकर दिल्ली में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की बात कही थी।
पुलिस ने उन्हें 19 जुलाई को ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से हिरासत में ले लिया। पुलिस के इस कदम को उनके सहयोगी लालमणि ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के माध्यम से चुनौती दी।
अदालत के सोमवार के आदेश के जवाब में आज राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 172 के तहत पुलिस को हिरासत में लेने का अधिकार है। यह भी दलील दी कि संसद तक मार्च निकालने की अनुमति नहीं थी। दिल्ली में निषेधाज्ञा लागू की गई थी और उसका उल्लंघन संज्ञेय अपराध है।
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