चेन्नई , सितंबर 17 -- मद्रास उच्च न्यायालय ने गुरुवार को प्रसिद्ध भारतीय क्रिकेटर एम.एस. धोनी को निर्देश दिया कि वह नौ अक्टूबर तक उस याचिका का जवाब दें, जिसे सेवानिवृत आईपीएस अधिकारी जी. संपत कुमार ने दायर किया है।
याचिका में पूर्व भारतीय कप्तान द्वारा 100 करोड़ रुपये के मानहानि मामले में उनके बयान की वीडियो रिकॉर्डिंग की मांग की गयी है।
न्यायमूर्ति गोविंदराजन थिलाकवडी ने संबंधित मामले की सुनवाई करते हुए श्री धोनी को नौ अक्टूबर तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई के लिए उस तारीख तक कार्यवाही स्थगित कर दी।
एक सितंबर को उच्च न्यायालय ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया था कि वह श्री कुमार द्वारा दायर तीन अर्जियों को नंबर दें। श्री धोने ने 2013 के आईपीएल सट्टेबाजी घोटाले में अपना नाम घसीटे जाने को लेकर पूर्व पुलिस अधिकारी और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ 2014 में 100 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा दायर किया था। इन अर्जियों में श्री धोनी की गवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने और उनकी स्वीकार्यता पर फैसला करने की मांग की गई।
न्यायमूर्ति थिलाकवडी ने यह निर्देश याचिकाकर्ता के वकील की दलीलों के बाद दिया, जिसमें कहा गया था कि तीनों मांगें सुनवाई के लायक हैं और इसी तरह के एक मामले में उच्चतम न्यायालय के आदेश का हवाला दिया गया। आदेश पर गौर करने के बाद उन्हें यकीन हो गया कि ऐसी अर्जियां दाखिल की जा सकती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अर्जियों के नंबर मिलने के बाद श्री धोनी को अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने का मौका दिया जायेगा।
पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान ने 2014 में प्राइवेट मीडिया, तमिलनाडु पुलिस अधिकारी संपत कुमार और अन्य लोगों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। यह मुकदमा उन तथाकथित दुर्भावनापूर्ण बयानों के लिए दायर किया गया था जिनमें आरोप लगाया गया था कि श्री धोनी 2013 के आईपीएल मैचों में सट्टेबाजी और मैच-फिक्सिंग में शामिल थे।
उच्च न्यायालय ने इस मामले में पहले श्री धोनी का बयान दर्ज करने के लिए एक एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने का आदेश दिया था।
श्री कुमार ने भी न्यायालय से श्री धोनी के बयान की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने का निर्देश देने की मांग की थी। उन्होंने अपनी याचिका में बयान दर्ज करने की प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक न्यायाधीश की नियुक्ति की मांग की। उन्होंने यह निर्देश भी मांगा कि वीडियो-रिकॉर्ड किये गये बयान की बिना एडिट की हुई कॉपी उन्हें प्रदान की जाये।
सेवानिवृत आईपीएस अधिकारी ने आगे यह भी अनुरोध किया कि बयान दर्ज करने की प्रक्रिया पांच सितारा होटलों या निजी बंगलों में न हो बल्कि इसे न्यायालय परिसर या सरकारी इमारत में आयोजित किया जाए।
पहली अर्ज़ी में, श्री कुमार ने न्यायालय से अपील की कि वह क्रिकेटर के सबूतों की रिकॉर्डिंग की निगरानी के लिए एक न्यायिक अधिकारी नियुक्त करे, जिसे न्यायालय द्वारा नियुक्त एडवोकेट कमिश्नर रिकॉर्ड करेगा। दूसरी अर्ज़ी में, उन्होंने पूरी कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने की बात की। याचिकाकर्ता ने कहा कि वीडियो रिकॉर्डिंग की बिना एडिट की हुई और सर्टिफ़ाइड कॉपी उन्हें और साथ ही न्यायालय द्वारा नियुक्त किये जाने वाले न्यायिक अधिकारी को दी जानी चाहिए। तीसरी बात, वह चाहते हैं कि सबूत रिकॉर्ड करने का काम कोर्ट परिसर या किसी सरकारी इमारत में हो। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा, "सिर्फ़ इसलिए कि वह एक क्रिकेटर हैं, सबूत किसी पांच सितारा होटल या किसी निजी बंगले में रिकॉर्ड नहीं किया जाना चाहिए।"न्यायामूर्ति सी.वी. कार्तिकेयन ने 11 अगस्त 2025 को श्री धोनी के बयान दर्ज करने के लिए अधिवक्ता जी. जयश्री को न्यायालय द्वारा कमिश्नर नियुक्त करते हुए मुकदमे की सुनवाई शुरू करने का आदेश दिया था।
श्री कुमार ने हालांकि उस आदेश को चुनौती दी थी लेकिन न्यायामूर्ति एस.एम. सुब्रमण्यम और न्यायमूर्ति मोहम्मद शफीक की पीठ ने चार नवंबर 2025 को अपील खारिज कर दी। इसके बाद पीठ ने कहा कि क्रिकेटर का बयान दर्ज करने के लिए उन्हें न्यायालय परिसर में मौजूद मास्टर कोर्ट में बुलाने के लिए कड़े सुरक्षा इंतज़ाम करने पड़ते। इसलिए एकल पीठ का उन्हें किसी दूसरी जगह पर बयान दर्ज करने के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करना गलत नहीं था।
पूर्व आईपीएस अधिकारी के अलावा, श्री धोनी ने ज़ी मीडिया कॉर्पोरेशन, पत्रकार सुधीर चौधरी और न्यूज़ नेशन नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड के ख़िलाफ़ भी मुक़दमा दायर किया था।
अट्ठाइस अक्टूबर 2025 को न्यायालय ने आदेश दिया था कि ज़रूरी शुल्क का भुगतान होने पर, न्यायालय का दुभाषिया मामले से जुड़ी सीडी में मौजूद जानकारी को ट्रांसक्राइब और अनुवाद करने का काम करे।
अपने आदेश में न्यायमूर्ति आर.एन. मंजुला ने कहा था कि यह एक बहुत बड़ा काम है और इसे पूरा करने में कम से कम एक दुभाषिया और एक टाइपिस्ट का काफ़ी समय और मेहनत लगेगी जिसमें लगभग तीन से चार महीने लग सकते हैं।
चूंकि इसमें एक दुभाषिया का पूरा समय और एक टाइपिस्ट की मदद की ज़रूरत है और कॉपी तैयार करने में अतिरिक्त खर्च भी आएगा इसलिए ट्रांसक्रिप्शन और अनुवाद का शुल्क 10 लाख रुपये निर्धारित किया गया, जिसका भुगतान धोनी को करना था।
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