भरतपुर , अगस्त 30 -- राजस्थान में धौलपुर जिले के ग्रामीण अंचल में रक्षाबंधन के उल्लास के बाद लोकपर्व फुलइयां धूमधाम के साथ मनाया गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार बच्चों में इस पर्व को लेकर खास उत्साह नजर आया। घरों में गेहूं के दाने उगाकर तैयार की गई हरी-हरी बालियां सजाई गईं और इन्हें लेकर बच्चों ने पर्व की परंपरा निभाई।

फुलइयां पर्व की तैयारी रक्षाबंधन के 10 दिन पहले से शुरू हो जाती है। मिट्टी से भरी छोटी टोकरी, पात्र या अन्य बर्तन में गेहूं के दाने बोए जाते हैं। इसके बाद रोजाना पानी देकर इन्हें उगाया जाता है। यह उगी हुई फसल पर्व का सबसे खास हिस्सा होती है। धौलपुर में इस परंपरा को कई जगह भुजरिया के नाम से भी जाना जाता है।

घर में उगी कुछ इंच की गेहूं की हरी बालियां बच्चों के लिए सिर्फ पौधे नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी, खेती और लोक संस्कृति से जुड़ने का जरिया हैं। यही वजह है कि रक्षाबंधन के बाद आने वाला यह छोटा-सा लोकपर्व अब भी घर-आंगन में हरियाली और खुशहाली का संदेश लेकर आता है। बच्चों की इस उगी हुई फसल को बाद में जल में प्रवाहित कर दिया जाता है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित