धार , मई 19 -- मध्यप्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में आगामी शुक्रवार को महाआरती आयोजित किए जाने की तैयारी की जा रही है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की नई गाइडलाइन और इंदौर उच्च न्यायालय के हालिया निर्णय के बाद हिंदू समाज ने 22 मई को भोजशाला परिसर में प्रवेश कर पूजन-अर्चन और महाआरती आयोजित करने की घोषणा की है।
आयोजन को लेकर आयोजित पत्रकार वार्ता में हिंदू नेता अशोक जैन ने कहा कि लगभग 721 वर्षों के बाद शुक्रवार के दिन हिंदू समाज को भोजशाला में अधिकारपूर्वक पूजन का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि राजा भोज द्वारा निर्मित मां सरस्वती मंदिर पर वर्ष 1305 में आक्रमण के बाद से हिंदू समाज इसके लिए संघर्ष कर रहा था।
आंदोलन से जुड़े दीपक बिडकर और सोनू गायकवाड़ ने बताया कि वर्ष 1997 से भोजशाला की मुक्ति और गौरव पुनर्स्थापना के लिए अभियान चलाया जा रहा था। उन्होंने कहा कि 15 मई 2026 को उच्च न्यायालय इंदौर द्वारा दिए गए निर्णय के बाद इस दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है।
पत्रकार वार्ता में बताया गया कि एएसआई द्वारा परिसर के नामकरण में परिवर्तन करते हुए केवल 'भोजशाला' नाम रखा गया है। आयोजकों के अनुसार इससे पूर्व शुक्रवार के दिन हिंदू समाज के प्रवेश पर रोक थी तथा मुस्लिम समाज को नमाज की अनुमति दी जाती थी। बसंत पंचमी जैसे अवसरों पर भी विवाद की स्थिति बनती रही थी।
हिंदू समाज के प्रतिनिधियों के अनुसार 22 मई को सकल हिंदू समाज के लोग धानमंडी चौराहे पर एकत्रित होंगे और वहां से लगभग एक किलोमीटर पैदल यात्रा करते हुए भोजशाला पहुंचेंगे। परिसर में मां सरस्वती का विधिवत पूजन-अर्चन एवं महाआरती की जाएगी। आयोजन को लेकर क्षेत्र में उत्साह का वातावरण है। प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।
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