भुवनेश्वर , फरवरी 23 -- ओडिशा विधानसभा में धान खरीदी के मुद्दे पर सोमवार को जमकर हंगामा हुआ जिसकी वजह से सदन की कार्यवाही चार बार स्थगित हुई।

विपक्षी विधायकों ने दावा किया कि मंडियों को लेकर राज्य सरकार के तौर-तरीके के कारण किसानों को विवश होकर धान को औने-पौने दाम पर बेचना पड़ रहा है। इस मुद्दे को लेकर विपक्षी सदस्यों ने बार-बार वेल में आकर नारेबाजी की, जिसके कारण अध्यक्ष सुरमा पाधी को सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी।

विपक्ष सदस्य विधानसभा में मंडी संकट को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। बीजू जनता दल (बीजद) और कांग्रेस के सदस्यों ने राज्य सरकार पर पूरे राज्य में मंडियों के कुप्रबंधन का आरोप लगाया, जिससे कथित तौर पर किसानों को अपने धान को मजबूरी में बेचना पड़ा है।

बीजद के सदस्यों ने सोमवार को मंडी मुद्दे पर अपना विरोध जारी रखा। कांग्रेस ने "एपस्टीन फाइल" से जुड़े विवाद पर ध्यान केंद्रित किया।

सदन की कार्यवाही सुबह 10:30 बजे शुरू हुई, लेकिन शोर-शराबे के बीच सिर्फ छह मिनट बाद ही कार्यवाही 11:30 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी। इसके बाद जब कार्यवाही फिर से शुरू हुई, तो कांग्रेस विधायक दल के नेता राम चंद्र कदम ने एपस्टीन फाइल का मुद्दा उठाया।

इस पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सदस्यों ने एतराज़ जताया और अध्यक्ष से रिकॉर्ड से नाम हटाने की अपील की। इसके बाद बीजद और कांग्रेस के सदस्य प्लेकार्ड लेकर और सरकार विरोधी नारे लगाते हुए सदन के वेल में आ गए। इस पर सत्तापक्ष के सदस्यों ने विपक्ष पर राजनीतिक वजहों से जानबूझकर सदन का काम रोकने का आरोप लगाया।

श्रीमती पाधी के सदस्यों से बार-बार अपनी सीटों पर लौटने और सदन को काम करने देने की अपील के बावजूद विरोध जारी रहा।

इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने व्यवस्था बहाल करने की कोशिश में अपने कक्ष में सर्वदलीय बैठक बुलाई लेकिन गतिरोध का कोई हल नहीं निकला। कोई नतीजा न निकलने पर उपाध्यक्ष भवानी शंकर भोई ने अपराह्न सदन की कार्यवाही शाम 4:00 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

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