फगवाड़ा , अक्टूबर 08 -- कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने पराली जलाने से रोकने और इसके वैज्ञानिक प्रबंधन केप्रति किसानों को जागरूक करने के लिए गुरुवार को पंजाब में फगवाड़ा के हॉटस्पॉट गांव उच्छापिंड में जागरूकता शिविर लगाया।
शिविर को संबोधित करते हुए एसडीएम डॉ. नवजोत शर्मा और पुलिस उपाधीक्षक पलविंदर सिंह ने किसानों से धान की पराली न जलाने और उसे खेत की मिट्टी में मिलाने की अपील की। डॉ. शर्मा ने कहा कि पराली को खेत में मिलाने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पराली जलाने से मिट्टी की गुणवत्ता तथा पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
श्री सिंह ने पराली जलाने पर लागू कानूनी प्रावधानों और जुर्माने की जानकारी देते हुए कहा कि इससे वायु प्रदूषण के साथ-साथ कानून के तहत कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने किसानों से फसल अवशेष प्रबंधन के वैकल्पिक तरीकों को अपनाने की अपील की।
ब्लॉक कृषि अधिकारी परमजीत सिंह माहे ने कहा कि पराली जलाने से मिट्टी में मौजूद लाभकारी कीट और सूक्ष्मजीव नष्ट होते हैं। उन्होंने बताया कि पराली को मिट्टी में मिलाने से जैविक पदार्थ बढ़ता है, नमी अधिक समय तक बनी रहती है और फसलों की पानी की जरूरत कम हो सकती है। इससे कीट एवं रोगों के प्रकोप में भी कमी आती है। उन्होंने किसानों को स्मार्ट सीडर, बेलर, रेक, सुपर सीडर, एमबी प्लाऊ, चॉपर और स्लेशर जैसी कृषि मशीनरी के उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आवश्यक मशीनरी उपलब्ध नहीं होने पर किसान संबंधित ब्लॉक कृषि कार्यालय से सहायता ले सकते हैं।
शिविर में गांव के सरपंच सुखविंदर सिंह, कृषि विभाग के कर्मचारी धर्मवीर, एनजीओ प्रतिनिधि कोमल, नंबरदार बलजिंदर सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण मौजूद रहे।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित