टिहरी , जुलाई 08 -- उत्तराखंड में जौनपुर विकासखंड के कैम्पटी स्थित धात्री स्वायत्त सहकारिता में स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पादों ने बुधवार को जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल का ध्यान आकर्षित किया।

जिलाधिकारी ने निरीक्षण के दौरान महिलाओं के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि स्थानीय संसाधनों पर आधारित स्वरोजगार की ऐसी पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ महिला सशक्तीकरण का प्रभावी माध्यम बन रही है।

निरीक्षण के दौरान सहकारिता के संचालक विरेन्द्र वर्मा ने बताया कि यह परियोजना मसूरी वन प्रभाग के अंतर्गत लखवाड़ बांध कैट प्लान के माध्यम से संचालित की जा रही है। इसके तहत सिया गांव, जेठू की काण्डी, काण्डी, डिगोन सहित आसपास के कई गांवों की महिलाएं पहाड़ी दालें, पारंपरिक मसाले, विभिन्न प्रकार के अचार, झंगोरा, मंडुवा आटा, चटनियां, बुरांश, नींबू और आंवला जूस, फलों का जैम, प्राकृतिक सूखा शैंपू, मंडुवा-झंगोरा से बने लड्डू एवं बर्फी तथा रिंगाल से निर्मित हस्तशिल्प उत्पाद तैयार कर बाजार तक पहुंचा रही हैं।

उन्होंने बताया कि क्षेत्र में तिमला, बेडू, किनगोड़, हिंसर, काली हिंसर, टिमरू, कड़ी पत्ता, भीमल, आंवला, रीठा, बिच्छूघास और तेजपात जैसे वन उत्पाद प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। इनका वैज्ञानिक तरीके से संग्रहण कर महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाता है और फिर इनसे मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार किए जाते हैं। सहकारिता के माध्यम से महिलाओं को ढींगरी मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। महिलाओं द्वारा तैयार ढींगरी मशरूम का अचार उपभोक्ताओं के बीच लोकप्रिय हो रहा है।

जिलाधिकारी ने कहा कि स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता सराहनीय है और ऐसे प्रयास महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित कर रहे हैं। उन्होंने विरेन्द्र वर्मा के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने तथा अधिक से अधिक महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य करने पर जोर दिया।

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