रायपुर , मार्च 19 -- त्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भारतीय जनता पार्टी की नीयत पर सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि धर्म स्वातंत्र्य विधेयक भाजपा के लिए केवल एक राजनीतिक प्रोपेगंडा है और इसे मुद्दा बनाकर वह धर्मांतरण के नाम पर राजनीति करती रही है।

दीपक बैज ने कहा कि यदि यह विधेयक कानून बन भी जाता है तो भी भाजपा धर्मांतरण के मुद्दे को समाप्त करने के बजाय उसे राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करती रहेगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2006 में रमन सिंह सरकार के समय भी धर्मांतरण को लेकर एक विधेयक विधानसभा से पारित कराया गया था, लेकिन वह करीब 20 वर्षों तक राजभवन में लंबित रहा। बैज ने सवाल उठाया कि उस दौरान कई वर्षों तक केंद्र और राज्य दोनों जगह भाजपा की सरकार रही, इसके बावजूद उस विधेयक को कानून का रूप नहीं दिया गया।

उन्होंने कहा कि भाजपा जनता को दिखाने के लिए कानून बनाने का स्वांग रचती है, जबकि वास्तविकता यह है कि वह धर्मांतरण के मुद्दे को जीवित रखना चाहती है ताकि समाज में ध्रुवीकरण की राजनीति की जा सके। बैज ने पूछा कि क्या भाजपा यह गारंटी देगी कि इस बार पारित होने वाला विधेयक फिर से राजभवन में लंबित नहीं रहेगा।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि जबरन धर्मांतरण को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने इसे देश के लिए गंभीर समस्या बताया था और इस विषय पर कानून बनाने के लिए केंद्र सरकार से पहल करने को कहा था। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी के बाद केंद्र में बैठी सरकार का दायित्व था कि वह जबरन धर्मांतरण के खिलाफ देशव्यापी कानून बनाए, लेकिन एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

बैज ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को चुनौती देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण के मुद्दे पर श्वेत पत्र जारी किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि रमन सिंह के कार्यकाल में कितने चर्च बने और भूपेश बघेल सरकार के दौरान कितने चर्च बने। उनके अनुसार भाजपा इस मुद्दे का उपयोग केवल राजनीतिक लाभ और मतों के ध्रुवीकरण के लिए करती है।

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