झुंझुनू , जून 23 -- राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कहा है कि धर्म और संस्कार हमारी पहचान हैं और इन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है।

श्री बागड़े मंगलवार को झुंझुनू जिले के पचलंगी गांव के झड़ाया बालाजी धाम में आयोजित 108 कुण्डीय श्रीराम महायज्ञ में आहुति देने के बाद आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि महायज्ञ जैसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा, भाईचारे और आध्यात्मिक चेतना का संचार करते हैं।

उन्होंने कहा कि 108 कुण्डीय श्रीराम महायज्ञ का मूल उद्देश्य विश्व शांति, जनकल्याण और पर्यावरण संरक्षण है। यज्ञ की प्रत्येक आहुति लोकमंगल और मानवता के कल्याण की भावना से समर्पित की जा रही है। ऐसे धार्मिक आयोजन भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं को जीवंत बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने अपने उद्बोधन में रामायण और महाभारत को विश्व के महानतम ग्रंथ बताते हुए भारतीय संस्कृति, दर्शन और ज्ञान परंपरा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने गीता प्रेस के संस्थापक हनुमान प्रसाद पोद्दार का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने भारत रत्न जैसे सर्वोच्च सम्मान को स्वीकार करने के बजाय समाज सेवा को प्राथमिकता दी। उन्होंने आमजन से उनके जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

श्री बागड़े ने महर्षि पतंजलि द्वारा करीब 2200 वर्ष पूर्व प्रतिपादित योग दर्शन का भी उल्लेख करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा की वैश्विक महत्ता पर प्रकाश डाला। भारतीय दर्शन केवल विचार नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक श्रेष्ठ पद्धति है। उन्होंने भगवान श्रीराम के जीवन चरित्र का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम ने अपना संपूर्ण जीवन समाज और लोककल्याण के लिए समर्पित किया।

इससे पहले श्री बागड़े के झड़ाया बालाजी धाम आगमन पर महायज्ञ सेवा समिति एवं संत-महात्माओं द्वारा उनका स्वागत किया गया। इस अवसर पर जलदाय मंत्री केएल चौधरी, खंडेला विधायक सुभाष मील, पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी, महामंडलेश्वर बलदेव दास महाराज, सीताराम दास महाराज सहित कई जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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