भुवनेश्वर , अप्रैल 15 -- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार को अपने संसदीय क्षेत्र संबलपुर के दलाईपाड़ा में वीर सुरेंद्र साई संग्रहालय का उद्घाटन किया और भावी पीढ़ियों को उनकी विरासत तथा इतिहास के बारे में जागरूक करने में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला।
श्री प्रधान ने महान स्वतंत्रता सेनानी वीर सुरेंद्र साई को साहस, धैर्य और वीरता का प्रतीक बताया और कहा कि यह संग्रहालय उनकी विरासत और उनसे जुड़ी बहादुरी की भावना को सम्मानित करने के लिए एक अनूठी पहल है।
इस संग्रहालय को संस्कृति और पर्यटन विभागों, जिला प्रशासन और इनटैक के संयुक्त प्रयासों से विकसित किया गया है। इसमें संबलपुर की समृद्ध विरासत, संस्कृति और परंपराओं को दर्शाने वाली दुर्लभ तस्वीरें प्रदर्शित की गयी हैं। आगंतुक यहां उन स्वतंत्रता सेनानियों के जीवंत कलात्मक चित्र देख सकते हैं, जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपना जीवन न्यौछावर कर दिया, साथ ही क्षेत्र की प्रमुख हस्तियों के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
श्री प्रधान ने कहा कि इन प्रदर्शनियों के माध्यम से संबलपुर की वीरतापूर्ण विरासत और जीवंत सांस्कृतिक पहचान को आकर्षक और सार्थक तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के निष्कर्षों का हवाला देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि संबलपुर का इतिहास 10,000 साल से भी पुराना है, जिसका प्रमाण क्षेत्र में मिली गुफा पेंटिंग और शैल कला (रॉक आर्ट) है। महानदी बेसिन में स्थित और पूजनीय समलेश्वरी मंदिर होने के कारण यह क्षेत्र अपने जंगलों, कृषि और जीवंत लोक संस्कृति के लिए विशिष्ट पहचान रखता है।
केंद्रीय मंत्री ने जोर दिया कि सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से देश भर में क्षेत्रीय स्वतंत्रता सेनानियों की कहानियों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने संबलपुर के निवासियों, विशेष रूप से छात्रों और युवाओं को संग्रहालय का दौरा करने और अपनी जड़ों से जुड़ने के लिए आमंत्रित किया।
जिला अधिकारियों के साथ चर्चा के दौरान श्री प्रधान ने खुलासा किया कि संबलपुर में एक नया 'कला, संगीत और शिल्प कॉलेज' स्थापित करने की योजना चल रही है। साथ ही उन्होंने स्थानीय कलाकारों के लिए चल रहे ऑडिटोरियम प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द पूरा करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
श्री प्रधान ने कहा कि संबलपुर की प्रसिद्ध सांस्कृतिक परंपराओं जैसे पंचबाद्यम, डलखाई और रंगबती को संरक्षित और बढ़ावा देना तथा कलाकारों को उचित मंच प्रदान करना प्रमुख प्राथमिकता बनी रहेगी।
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