नयी दिल्ली , जुलाई 22 -- कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि छात्रों से मारपीट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी माफी मांगे।
श्री गांधी ने बुधवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि ये मांग कांग्रेस की नहीं आंदोलन कर रहे छात्रों की है और कांग्रेस छात्रों की इस मांग का पूरा समर्थन करती है। उनका कहना था कि इन मांगों से कोई समझौता नहीं किया जायेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के आंदोलन से घबरायी हुई है और आंदोलन कर रहे छात्रों के खिलाफ की जाने वाली उसकी कार्रवाई इसी घबराहट का परिणाम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष चाहता है कि संसद में छात्रों के मुद्दे पर चर्चा हो और सदन का संचालन इसी पर निर्भर करेगा।
श्री गांधी ने एक सवाल के जवाब में कहा कि संसद में विपक्ष का गुरुवार को क्या रवैया होगा यह सब कल सुबह संसद भवन परिसर में होने वाली विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक में लिए गये निर्णय पर निर्भर करेगा। उनका यह भी कहना था कि सरकार छात्रों के प्रति अत्यंत असंवेदनशील है। पिछले दस वर्षों में देश में 152 पेपर लीक हुए, जिससे 7.5 करोड़ छात्र और उनके परिवार प्रभावित हुए, लेकिन किसी भी मामले में दोषियों को सजा नहीं दी गयी।
कांग्रेस नेता ने कहा कि छात्र प्रतिदिन आठ-दस घंटे मेहनत करते हैं, फिर भी पेपर लीक होने से उनकी मेहनत पर पानी फिर जाता है। उन्होंने उसे गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के साथ अन्याय बताया और कहा कि इन्हीं परिवारों के बच्चे पेपर लीक जैसे अपराध से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। नीट जैसी परीक्षाएं छात्रों और उनके परिवारों के लिए इतनी महंगी हो गयी हैं कि इन परिवारो के लिए इसे वहन करना अत्यधिक मुश्किल हो गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र और उनके परिवार एक परीक्षा पर लगभग उतना ही खर्च करते हैं, जितना केंद्र सरकार पूरे शिक्षा बजट पर करती है। इसका अनुमानित आंकड़ा देते हुए उन्होंने बताया कि नीट परीक्षा के लिए 1.32 लाख करोड रुपए खर्च आता है। इस तरह से एक बच्चे पर हर साल नीट की तैयारी के दौरान खर्च होता है जबकि सरकार का शिक्षा का बजट 1.4 लाख करोड़ रुपये है। उनका कहना था कि शिक्षा को बहुत महंगा कर दिया गया है और शिक्षा व्यवस्था आम लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही है।
श्री गांधी ने कहा कि युवाओं के सामने रोजगार के अवसर लगातार कम हो रहे हैं। विनिर्माण, उद्यमिता, कॉरपोरेट नौकरियां और सार्वजनिक क्षेत्र कमजोर किये गये हैं, जिससे सरकारी नौकरी ही एक प्रमुख विकल्प बचा है, लेकिन वहां भी व्यवस्था भ्रष्ट और पक्षपातपूर्ण हो गयी है। शिक्षा पूरी करने के बाद युवाओं को रोजगार और बेहतर भविष्य की गारंटी मिलनी चाहिए।
कांग्रेस नेता ने एक सवाल के जवाब में कहा कि पुलिस का उन्हें हिरासत में लिया जाना या धक्का-मुक्की उनके लिए कोई बड़ी बात नहीं है और वह जनता तथा छात्रों की आवाज उठाते रहेंगे। उन्होंने दावा किया कि ड्यूटी पर मौजूद कुछ पुलिसकर्मियों ने भी निजी तौर पर छात्रों के साथ हुई घटना पर असहमति जतायी।
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