धर्मशाला , फरवरी 12 -- धर्मशाला के कांगड़ा कला संग्रहालय में विशेष तीन दिवसीय भारत-मलेशिया कला प्रदर्शनी दोनों देशों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और समकालीन कला रूपों की जीवंत झलक पेश कर रही है।

इस प्रदर्शनी का उद्घाटन धर्मशाला के कांग्रेस उम्मीदवार देवेंद्र जग्गी ने किया। इसमें भारत-मलेशिया के लगभग 35 कलाकारों की पेंटिंग्स, इंस्टालेशन और पारंपरिक कला रूप शामिल हैं। इसमें मलेशिया के 14 कलाकार भाग ले रहे हैं। प्रदर्शनी में धर्मशाला, पठानकोट, चंडीगढ़, जयपुर और देश के अन्य हिस्सों के कलाकार भी शामिल हैं।

संग्रहालय की क्यूरेटर ऋतु मालकोटिया ने कहा कि प्रदर्शनी का उद्देश्य भारत-मलेशिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना और कलाकारों को अन्तरराष्ट्रीय मंच प्रदान करना है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की पहल कला के माध्यम से देशों के बीच संवाद और आपसी समझ को बढ़ावा देने में मदद करती है।

मुख्य अतिथि देवेंद्र जग्गी ने कहा कि यह प्रदर्शनी भारत-मलेशिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों को समझने का अनूठा अवसर प्रदान करती है। उन्होंने प्रदर्शनियों को देखने के बाद कहा, "यहां प्रदर्शित विविध कलाकृतियां स्पष्ट रूप से दोनों देशों की सांस्कृतिक सम्पन्नता और साझा मूल्यों को प्रतिबिंबित करती हैं।"राजस्थान की कलाकार नीलू कांवरिया की प्रदर्शनी में अपनी तीन कलाकृतियां प्रदर्शित की हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पेंटिंग्स मानव विचारों और भावनाओं की खोज करती हैं। कांवरिया को कला के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वह देश भर में अपनी कला का प्रदर्शन कर चुकी हैं और कई पुरस्कार जीते हैं।

जयपुर के कलाकार राजकुमार चौहान ने कहा कि उनकी कला यात्रा धर्मशाला में तीन दशक पहले शुरू हुई थी। उन्होंने वासुदेव को भगवान कृष्ण को ले जाते हुए और देवी भगवती को उनकी रक्षा करते हुए चित्रित किया है। चौहान ने कला-संस्कृति को बनाये रखने और बढ़ाने के लिए अधिक सरकारी समर्थन की आवश्यकता पर जोर दिया।

प्रदर्शनी का दौरा करने वाले कला प्रेमियों ने इसे भारत और मलेशिया की सांस्कृतिक विविधता को करीब से समझने का मूल्यवान अवसर बताया।

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