धमतरी , मई 29 -- छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के ग्राम खरेंगा में कथित अवैध रेत उत्खनन के दौरान मानव कंकाल मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि वर्षों पुराने पारंपरिक श्मशान स्थल पर लगातार रेत खनन किए जाने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। घटना के बाद प्रशासन और खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार गुरुवार को गांव में मनरेगा के तहत कार्य चल रहा था। इसी दौरान ग्रामीणों को सूचना मिली कि श्मशान घाट क्षेत्र से रेत निकाली जा रही है तथा खुदाई के दौरान मानव अवशेष बाहर आ रहे हैं। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों के अनुसार स्थल पर विभिन्न स्थानों पर मानव कंकाल और अस्थियां बिखरी हुई मिलीं। मौके पर रेत से भरे दो से तीन ट्रैक्टर भी खड़े पाए गए, हालांकि ग्रामीणों के पहुंचते ही चालक वाहन छोड़कर फरार हो गए।
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध रेत उत्खनन की शिकायतें मिलती रही हैं और खदान के सीमांकन को लेकर भी विवाद बना हुआ है। उनका दावा है कि अब तक दस से अधिक मानव कंकाल और अस्थि अवशेष मिलने की जानकारी सामने आई है, जिनमें कुछ अवशेष अपेक्षाकृत नए प्रतीत हो रहे हैं। ग्रामीणों ने तत्काल उत्खनन कार्य रोकने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
ग्राम विकास समिति के सदस्य सुभाष साहू ने शुक्रवार को ये आरोप लगाया कि रेत माफिया लगातार श्मशान क्षेत्र में अवैध उत्खनन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मनरेगा कार्य के दौरान मिली सूचना के बाद ग्रामीण मौके पर पहुंचे, जहां खुदाई से मानव अवशेष निकलते देख लोगों में दहशत का माहौल बन गया।
ग्राम पंचायत की सरपंच नीलम साहू ने बताया कि रेत खनन को लेकर पंचायत एवं ग्राम विकास समिति की बैठक में पहले ही श्मशान घाट क्षेत्र में उत्खनन प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया गया था तथा इसकी मुनादी भी कराई गई थी। इसके बावजूद कथित रूप से अवैध खनन जारी रहा। उन्होंने कहा कि मामले की शिकायत जिला प्रशासन और कलेक्टर से कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में जिले के प्रभारी मंत्री टंकराम वर्मा ने अवैध रेत उत्खनन के विरुद्ध सख्त कार्रवाई का दावा किया था। उन्होंने कहा था कि प्रशासन द्वारा लगातार कार्रवाई करते हुए वाहनों की जब्ती की जा रही है। हालांकि खरेंगा में सामने आई यह घटना प्रशासनिक दावों की प्रभावशीलता पर नए सवाल खड़े कर रही है।
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