नैनीताल , जुलाई 23 -- उत्तराखंड के निकाय चुनाव में दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध संबंधी प्रावधान को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है।

ऊधमसिंह नगर जिले के किच्छा निवासी नईमुलशान खान और अन्य की ओर से चुनौती दी गई है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने इस मामले में गुरुवार को सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

साथ ही खंडपीठ ने महाधिवक्ता को भी नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई के लिए चार सप्ताह बाद की तिथि नियत की गई है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से उत्तराखंड नगर पालिका एवं नगर निगम संशोधन अधिनियम, 2002 के उस प्रावधान को चुनौती दी है, जिसके तहत निर्धारित कटऑफ तिथि के बाद दो से अधिक बच्चे वाले व्यक्ति नगर पालिका या नगर निगम के चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो जाते हैं।

याचिका में कहा गया है कि पंचायत चुनावों में दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवारों की अयोग्यता संबंधी प्रावधान 27 सितंबर 2009 के बाद लागू किया गया, जबकि नगर पालिका और नगर निगम क्षेत्रों के लिए यह प्रावधान वर्ष 2002 से प्रभावी है। याचिकाकर्ता का कहना है कि कई ऐसे गांव, जो पहले ग्रामीण क्षेत्रों में शामिल थे, बाद में परिसीमन के दौरान नगर पालिका या नगर निगम की सीमा में शामिल हो गए। ग्रामीण क्षेत्र में रहते हुए संबंधित लोग चुनाव लड़ने के पात्र थे लेकिन नगरीय क्षेत्र में शामिल होने के बाद वे दो से अधिक बच्चों के कारण चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो गए।

यह भी तर्क दिया गया है कि नगर निकायों का विस्तार भी ग्राम पंचायत क्षेत्रों के विलय से होता है। ऐसे में पंचायतों और नगर निकायों के लिए दो अलग-अलग कटऑफ तिथियां होने से समान परिस्थितियों वाले नागरिकों के साथ भेदभाव हो रहा है और यह संविधान प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन है।

याचिकाकर्ताओं ने उच्च न्यायालय से नगर निकायों में दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवारों की अयोग्यता के लिए लागू वर्ष 2002 की कटऑफ तिथि को बदलकर 27 सितंबर 2009 करने की मांग की है ताकि परिसीमन के बाद नगरीय क्षेत्रों में शामिल हुए ऐसे लोग भी चुनाव लड़ने के पात्र हो सकें।

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