बैतूल , जून 12 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में पिछले लगभग दो माह से जिला पंचायत में स्थायी मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति नहीं होने से प्रशासनिक कार्यों और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ने लगा है।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार जिला पंचायत के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी अक्षत जैन का 16 अप्रैल को तबादला कर उन्हें रीवा नगर निगम का आयुक्त नियुक्त किया गया था। उनके कार्यमुक्त होने के बाद जिला पंचायत की अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी इंदिरा महतो को अस्थायी रूप से जिम्मेदारी सौंपी गई थी। बाद में नियमित प्रभार को लेकर उनकी अनिच्छा के चलते नौ मई को कलेक्टर डॉ. सौरभ सोनवणे ने अपर कलेक्टर वंदना जाट को जिला पंचायत सीईओ का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया।

तब से जिला पंचायत का संचालन अतिरिक्त प्रभार व्यवस्था के माध्यम से किया जा रहा है। प्रशासनिक हलकों में शीघ्र स्थायी नियुक्ति की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन अब तक इस संबंध में कोई निर्णय नहीं हो सका है।

जिला पंचायत से जुड़े सूत्रों के अनुसार स्थायी सीईओ के अभाव का असर विभिन्न विकास योजनाओं और वित्तीय मामलों पर दिखाई देने लगा है। पंचायत निधि, खनिज मद, 15वें वित्त आयोग तथा अन्य विकास योजनाओं से संबंधित भुगतान और प्रशासनिक स्वीकृतियों की प्रक्रिया अपेक्षाकृत धीमी हुई है। नियमित सीईओ की उपलब्धता में प्रतिदिन बड़ी संख्या में फाइलों का निराकरण होता था, जबकि अतिरिक्त प्रभार व्यवस्था में निर्णय प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

इस बीच जिला पंचायत के सामने आगामी एक जुलाई से लागू होने वाली नई ग्रामीण रोजगार योजना की तैयारियों की चुनौती भी है। राज्य सरकार द्वारा मनरेगा के स्थान पर लागू की जा रही जीरामजी योजना के लिए प्रशिक्षण, प्रचार-प्रसार और प्रशासनिक तैयारियों सहित अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए जाने हैं।

प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि जिले में संचालित विकास योजनाओं की प्रभावी निगरानी और समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए पूर्णकालिक मुख्य कार्यपालन अधिकारी की नियुक्ति आवश्यक है। फिलहाल शासन स्तर पर इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

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