भिण्ड , अगस्त 28 -- मध्यप्रदेश के भिण्ड जिले के मेहगांव क्षेत्र में पिछले तीन दिनों से हो रही बारिश के बाद झिलमिल और बैसली नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। जलस्तर बढ़ने से ग्रामीण सड़कों पर बने चार पुल-पुलिया पानी में डूब गए हैं, जिससे कई गांवों का सीधा संपर्क मेहगांव और आसपास के कस्बों से टूट गया है।
ग्रामीणों को अब अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्गों से 20 से 30 किलोमीटर तक अतिरिक्त सफर करना पड़ रहा है। खास बात यह है कि ये सभी पुल-पुलिया पिछले करीब दस वर्ष के भीतर बनाए गए हैं। जलस्तर बढ़ने पर इनके डूबने से ग्रामीण विकास विभाग की निर्माण योजना और पुलों की ऊंचाई तय करने की इंजीनियरिंग पर सवाल उठ रहे हैं।
गहेली कनाथर के पास झिलमिल नदी का जलस्तर बढ़ने से पुल-पुलिया पानी में डूब गई है। इस मार्ग से सीधे मेहगांव जाने वाले ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित हुआ है। अब लोगों को अमायन और मौ होकर गोरम-चिटावली के रास्ते मेहगांव पहुंचना पड़ रहा है।
कुपावली के पास झिलमिल नदी पर बना पुल भी बढ़े जलस्तर की चपेट में आ गया है। सामान्य दिनों में ग्रामीण आजीमाता होते हुए सीधे मेहगांव पहुंचते हैं, लेकिन पुल डूबने के बाद यह मार्ग बंद हो गया है। अब गोरम-चिटावली होकर जाना पड़ रहा है। इससे मेहगांव पहुंचने की दूरी करीब 30 किलोमीटर से बढ़कर लगभग 50 किलोमीटर हो गई है।
बरासो क्षेत्र में बैसली नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद नदी पर बना पुल भी डूब गया है। पहले ग्रामीण अमायन से सीधे मेहगांव पहुंचते थे, लेकिन पुल पर पानी आने के कारण यह रास्ता बंद हो गया है। अब लोगों को भिण्ड होकर मेहगांव जाना पड़ रहा है। इससे सफर लगभग दोगुना हो गया है और समय के साथ ईंधन का खर्च भी बढ़ रहा है।
सुरूरू गांव को जोड़ने वाला पुल भी बैसली नदी के बढ़े जलस्तर के कारण डूब गया है। पुल पर पानी आने से ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित है। मेहगांव जाने वाले लोगों को अब पहले भिण्ड और फिर वहां से मेहगांव जाना पड़ रहा है, जिससे करीब 20 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।
ग्रामीण सुनील सिंह राजावत ने कहा कि इन क्षेत्रों में बने पुल-पुलिया दशकों पुराने नहीं हैं, बल्कि अधिकांश निर्माण पिछले करीब दस वर्ष में हुए हैं। इसके बावजूद बारिश के दौरान नदियों का जलस्तर बढ़ते ही इनके डूबने की स्थिति बन जाती है। इससे सवाल उठता है कि पुलों की ऊंचाई तय करते समय नदी के कैचमेंट क्षेत्र, पुराने बाढ़ स्तर और संभावित अधिकतम जलस्तर का पर्याप्त आकलन किया गया था या नहीं।
ग्रामीणों के अनुसार कई पुल-पुलिया पर सुरक्षा के लिए पर्याप्त रेलिंग या बाउंड्रीवाल भी नहीं है। पानी बढ़ने के बाद पुल की चौड़ाई और सड़क का किनारा स्पष्ट दिखाई नहीं देता, जिससे दुर्घटना की आशंका के कारण प्रशासन को आवागमन रोकना पड़ता है।
पुलों के डूबने से किसानों को खेतों तक पहुंचने, विद्यार्थियों को स्कूल-कॉलेज जाने और मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में परेशानी हो रही है। रोजमर्रा के काम से मेहगांव आने-जाने वाले ग्रामीणों को भी लंबे वैकल्पिक मार्ग अपनाने पड़ रहे हैं, जिससे समय और परिवहन खर्च दोनों बढ़ रहे हैं।
ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से पुल-पुलियों का तकनीकी निरीक्षण कराने तथा आवश्यकता के अनुसार उनकी ऊंचाई बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि बारिश के मौसम में नदियों का जलस्तर बढ़ना सामान्य प्रक्रिया है, इसलिए पुलों का निर्माण इस तरह होना चाहिए कि सामान्य बाढ़ के दौरान भी संपर्क मार्ग चालू रहे।
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