नैनीताल , फरवरी 24 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण द्वारा देहरादून की एक मस्जिद को सील करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया।
न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि बिना अनुमति निर्माण करने वाले व्यक्ति या संस्था को अनुच्छेद २२६ के तहत राहत नहीं दी जा सकती। एकलपीठ ने कहा कि जो व्यक्ति स्वयं कानून का उल्लंघन कर रहा हो वह न्यायालय में राहत की अपेक्षा नहीं कर सकता। बिना अनुमति निर्माण कर बाद में न्यायालय से संरक्षण मांगना विधि विरुद्ध है।
अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता चार सप्ताह के भीतर कंपाउंडिंग हेतु प्राधिकरण के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर सकता है।
याचिकाकर्ता जामा मस्जिद सोसायटी, देहरादून ने एमडीडीए के 13 फरवरी 2026 के उस नोटिस को निरस्त करने की मांग की गयी थी जिसमें वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून को मस्जिद को सील करने हेतु पुलिस सहायता मुहैया कराने की मांग की गयी थी।
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