चित्तौड़गढ़ , मार्च 08 -- विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय सह संगठन मंत्री विनायक राव पांडे ने कहा है कि वर्तमान में देश में अगर सबसे बड़ी कोई समस्या है तो वह जातिगत भेदभाव है।
श्री पांडे रविवार को यहां विश्व हिंदू परिषद द्वारा आयोजित विशाल समरसता सम्मेलन में कहा कि सदियों पूर्व देश में यह समस्या नहीं थी। जिसका सबसे बड़ा उदाहरण हमारा कुम्भ स्नान है जहां यह कोई नहीं पूछता कि स्नान करने वाला किस जाति का है, बस सब हिंदू है। उस समय वर्ण व्यवस्था थी जो कार्य के अनुरुप थी।
उन्होंने वैदिक काल से लेकर रामायण महाभारत तक के उदाहरण दिये और कहा कि शूद्र भी राजा होते थे, महर्षि होते थे, लेकिन इस्लामिक आक्रमणकारियों ने आक्रमण के दौरान जिन्हे अब तथाकथित अनुसूचित जाति का वाल्मीकि कहते हैं उन्होंने इस्लाम नहीं अपनाया तो उन्होंने उनसे अपने घरों का मैला उठवाया। उन्हें इस जाति में बांटा।
श्री पांडे ने कहा कि इसी तरह मुगलों से पूर्व हमारे यहाँ चमड़े के जूते पहनने का रिवाज़ था ही नहीं, लेकिन जिन्हे अब रैगर, खटीक कहते है उनसे पशू कटवाए और चमड़ा उतरवाया। इसी कारण अब ये जो गौत्र लगाते है उनमें से 27 गौत्र क्षत्रिय एवं दो गौत्र ब्राह्मण समाज के हैं तो अब इनके साथ भेदभाव क्यों।
उन्होंने डा. भीमराव अम्बेडकर की लिखी सेंकड़ों पुस्तकों एवं उनके भाषणों के कुछ अंश भी इस बात के पक्ष मे रखे कि हिंदू समाज को जातिगत भेदभाव में बांटने का कार्य इस्लामिक आक्रमणकारियों ने किया जिसे अंग्रेजों ने और बढाया और यही धारणा अब कुछ लोग फैलाकर हिंदू समाज को बांटने में लगे हैं जिससे देश कमजोर हो रहा है।
श्री पांडे ने कहा कि सवर्ण कहने वाले अपने घर में कुत्ता बिल्ली रखते हैं जो उनके बेडरूम, पूजाघर और रसोई तक आ सकते हैं तो हम इन तथाकथित अनुसूचित जाति के कहलाने वालों के साथ बैठ क्यों नहीं सकते हैं। क्या हम इंसान नहीं है या वे तथाकथित अनुसूचित जाति के लोग इंसान नहीं है। सम्मेलन में बड़ी संख्या में दलित समुदाय की उपस्थिति रही।
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