उदयपुर , अप्रैल 24 -- राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष प्रोफेसर वासुदेव देवनानी ने भारत के संविधान और लोकतंत्र को किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं बताते हुए कहा है कि यहां दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र निरन्तर संवर्धित हो रहा है।
प्रोफेसर देवनानी शुक्रवार को उदयपुर सर्किट हाउस में मीडियाकर्मियों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत में लोकतंत्र की जड़े बहुत गहरी हैं। सदियों से यहां लोकतांत्रिक व्यवस्था चली आ रही है। आधुनिक समय में भारत दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे प्रभावी लोकतंत्र है।
विधायिका में महिलाओं के आरक्षण से जुड़े 131वेें संविधान संशोधक विधेयक के हाल ही में संसद में पारित नहीं होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं आत्मनिर्भरता और सहभागिता चाहती हैं। इस विषय पर राजनीति से ऊपर उठकर महिलाओं के उनका हक दिलाना चाहिए। उन्होंने परिसीमन का समर्थन करते हुए कहा कि 2011 के बाद जनगणना एवं लम्बे समय से परिसीमन नहीं हुआ है। अतः इसे शीघ्रता से पूरा किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि परिसीमन के पश्चात राजस्थान में 200 के स्थान पर 270 विधानसभा क्षेत्र गठित होने की सम्भावना है। ऐसे में विधायकों के बैठने की व्यवस्था को लेकर तैयारियां अभी से प्रारम्भ कर दी गयी है। उन्होंने कहा कि विधानसभा भवन के चतुर्थ तल पर 280 सीटों का हॉल तैयार किया जा रहा है। संसद की तर्ज पर सेंट्रल हॉल बनाने की योजना है ।
श्री देवनानी ने बताया कि आगामी पांच मई को जयपुर में सात राज्यों के विधानसभाध्यक्षों की सेमिनार का आयोजन किया जाएगा। इसमें विभिन्न समितियों की कार्यप्रणाली पर विशेष चर्चा की जाएगी। इस अवसर पर विधानसभा परिसर में हर्बल वाटिका और नक्षण वाटिका का लोकार्पण भी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अब तक 50 हजार लोग विधानसभा में बने म्यूजियम को देखने आ चुके हैं।
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