नयी दिल्ली , मई 20 -- केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि देश ने मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) और शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) में वैश्विक रुझानों से कहीं अधिक तेजी से महत्वपूर्ण कमी हासिल की है।

श्री नड्डा ने बुधवार को जिनेवा में 79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा के दौरान मातृ, नवजात एवं बाल स्वास्थ्य साझेदारी (पीएमएनसीएच) की बोर्ड अध्यक्ष हेलेन क्लार्क के साथ द्विपक्षीय बैठक की। उन्होंने इस दौरान महिलाओं, बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य के वैश्विक एजेंडे को आगे बढ़ाने के प्रति भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि भारत इस संगठन के साथ अपनी साझेदारी जारी रखने और इसके उद्देश्यों में सार्थक योगदान देने पर गर्व महसूस करता है।

उन्होंने बताया कि भारत द्वारा दिया जाने वाला 20 लाख अमेरिकी डॉलर का वार्षिक अनुदान स्थायी रूप से प्रक्रियाधीन है और इसकी जानकारी शीघ्र ही साझा की जाएगी। उन्होंने सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों पर जोर देते हुए कहा, "भारत नवाचार का केंद्र रहा है और इसने समानता और सुलभता के साथ व्यापक स्तर पर हस्तक्षेप किए हैं। हमने महिलाओं, बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य को अपने सेवा वितरण और सतत विकास के केंद्र में रखा है।"केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि 'भारत उन पहले देशों में से था जिन्होंने 2014 में किशोरों के लिए एक समर्पित राष्ट्रीय कार्यक्रम शुरू किया', जिसके तहत देशभर में सुविधा-आधारित, विद्यालय-आधारित और समुदाय-आधारित हस्तक्षेपों के माध्यम से युवाओं तक पहुंचा गया।

उन्होंने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में भारत की प्रगति का जिक्र करते हुए कहा कि देश ने मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) और शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) में वैश्विक रुझानों से कहीं अधिक तेजी से महत्वपूर्ण कमी हासिल की है। भारत अपने साक्ष्य-आधारित सर्वोत्तम अभ्यासों और बड़े पैमाने पर लागू किए गए सफल जन स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के माध्यम से वैश्विक समुदाय को बहुत कुछ प्रदान कर सकता है। उन्होंने अन्य देशों को तकनीकी मार्गदर्शन और सहायता प्रदान करने के लिए भारत की तत्परता व्यक्त की और पीएमएनसीएच को भौतिक और आभासी मंचों के माध्यम से भारत के सफल मॉडलों और नवाचारों को और अधिक प्रदर्शित करने के लिए आमंत्रित किया।

श्री नड्डा ने प्राचीन भारतीय दर्शन 'वसुधैव कुटुंबकम' यानी 'विश्व एक परिवार है' का आह्वान करते हुए वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने में एकता, करुणा और साझा मानवता में भारत के विश्वास पर जोर दिया।

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