गांधीनगर , जनवरी 13 -- गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने राज्य के पहले अत्याधुनिक बायो-कंटेनमेंट फैसिलिटी 'बायो-सेफ्टी लेवल-4' लैब तथा 'एनिमल बायो-सेफ्टी लेवल' सुविधा के शिलान्यास अवसर पर मंगलवार को इसे देश को संभावित महामारियों के विरुद्ध अधिक सुरक्षित बनाने वाला प्रोजेक्ट बताया।
श्री पटेल ने इस प्रकल्प को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हेल्थ केयर और आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का एक महत्वपूर्ण प्रकल्प बताया और कहा कि वह समय से आगे सोचने वाले विजनरी लीडर हैं। उनके ऐसे ही विजन के कारण हमने गुजरात बायो-टेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर (जीबीआरसी) को कार्यरत कर वायरल रोगों, जेनेटिक संक्रमणों और महामारी जैसे गंभीर स्वास्थ्य क्षेत्रों के निदान अनुसंधान के लिए बाहरी संस्थाओं पर निर्भर न रहकर आत्मनिर्भरता का लक्ष्य प्राप्त किया है।मुख्यमंत्री ने बीएसएल-4 लैब के कार्यरत होने से हाई रिस्क वाले वायरस पर राज्य में अनुसंधान संभव होने से समय पर, सटीक और विश्वसनीय निदान उपलब्ध होने तथा स्वास्थ्य प्रणाली के अधिक सशक्त और सज्ज बनने का विश्वास व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जीबीआरसी केवल एक अनुसंधान संस्थान ही नहीं, बल्कि राज्य की बायो-टेक कैपेसिटी का नोडल सेंटर भी है। इसकी भूमिका देते हुए उन्होंने कहा कि बीएसएल-4 लैब में होने वाला अनुसंधान सीधे निदान, उपचार और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों में परिवर्तित होने वाला ट्रांजिशनल रिसर्च बनेगा।
उन्होंने कहा कि 'विकसित भारतएट 2047' के प्रधानमंत्री के संकल्प को स्वस्थ, सुरक्षित और आत्मनिर्भर भारत के रूप में साकार करने में यह बीएसएल-4 फैसीलिटी माइलस्टोन सिद्ध होगी।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने स्वागत भाषण में कहा कि जिस तरह भारत के इतिहास और भूगोल को बदलने में महात्मा गांधी और सरदार पटेल का योगदान रहा है, उसी तरह आधुनिक भारत और गुजरात का भाग्य बदलने का कार्य प्रधानमंत्री श्री मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री श्री शाह ने किया है।
श्री मोढवाडिया ने कहा कि गुजरात की यह पहली और देश की अत्यंत महत्वपूर्ण अनुसंधान सुविधा वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करने में निर्णायक सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री की परिकल्पना से 'गुजरात स्टेट बायो-टेक्नोलॉजी मिशन' (जीएसबीटीएम) की स्थापना हुई थी। आज उसी विजन के परिणामस्वरूप गुजरात एशिया के पहले समर्पित बायो-टेक विश्वविद्यालय वाला राज्य बना है। जिस अनुसंधान सुविधा का आज शिलान्यास हुआ है, वह भारत सरकार द्वारा डेजिग्नेट गुजरात की इस प्रकार की पहली अनुसंधान सुविधा है।
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