जयपुर , मई 27 -- राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि देश को बचाना है तो प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की विदेश नीति को अपनाना होगा।
श्री गहलोत ने बुधवार को पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि के अवसर पर उन्हें नमन करते हुए यहां यह बात कही। उन्होंने कहा कि आज़ादी की जंग के अंदर जो पंडित नेहरू की भूमिका रही, करीब नौ-दस साल तक वह जेलों में बंद रहे, लंबा संघर्ष किया महात्मा गांधी के सान्निध्य में, वह लंबी कहानी देशवासियों को मालूम है।
उन्होंने कहा कि नेहरू ने जो आधारभूत ढांचा देश में तैयार किया, उसी पर आज देश टिका हुआ हैं। देश के प्रधानमंत्रियों के इतिहास का ज़िक्र करते हुए श्री गहलोत ने कहा कि पंडित नेहरू की जो विदेश नीति थी, उसको किसी ने प्रधानमंत्री या सरकार ने बदलाव नहीं किया। चाहे वे पंडित नेहरू के विचारों से मिलते या नहीं मिलते हों।
उन्होंने श्री अटलबिहारी वाजपेयी के विदेश मंत्री कार्यकाल को याद करते हुए कहा, " उन्हें याद है मोरारजी देसाई के समय एक बार वाजपेयी जी विदेश मंत्री थे, तब भी उन्होंने कहा था कि विदेश नीति पंडित नेहरू की ही चलेगी देश के अंदर, वह ज़माना हमने देखा है।"वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए श्री गहलोत ने कहा, ''आज हम क्या देख रहे हैं, हमारी विदेश नीति की जो हालत हुई है, उसके कारण से पूरा देश चिंतित है। विदेश नीति ऐसी हो गई है कि कोई मुल्क आपके साथ ही खड़ा नहीं है।"उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर हुआ, दुनिया का एक मुल्क भारत के साथ खड़ा नहीं हुआ। श्री गहलोत ने इतिहास की याद दिलाते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के वक्त में यह सातवां बेड़ा जो है अमेरिका का, जो अब ईरान में जा रहा है, उससे बड़ा बेड़ा भारत के खिलाफ भेज दिया गया था, जब बंगलादेश की आज़ादी का युद्ध चल रहा था, लेकिन इंदिरा गांधी ने अमेरिका की परवाह नहीं की। आज स्थिति यह है कि अमेरिका कहता है कि आप तेल रूस से नहीं खरीदो।"श्री गहलोत ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर टीका टिपण्णी करते हैं और वह कभी भारत के बारे में बहुत ही निम्न बातें करते हैं और हम चुप हैं। यह हमारी विदेश नीति के हालात हैं।
उन्होंने कहा कि अगर देश को बचाना है तो प्रधानमंत्री को जो पंडित नेहरू की विदेश नीति थी, उस पर वापस देश को लाना चाहिए।
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