जयपुर , अगस्त 20 -- देश को अधिक उपज वाली गेहूं एवं जौ की 26 उन्नत किस्में मिली हैं और जोबनेर कृषि विश्वविद्यालय की जौ की चार किस्में राष्ट्रीय स्तर पर शामिल की गयी हैं।
श्री कर्ण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर की अधीनस्थ इकाई राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुरा, जयपुर में आयोजित गेंहू एवं जौ अनुसंधान की तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का गुरुवार को समापन हुआ और इसमें देश के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों के लिए गेहूं की 15 तथा जौ की 11 उन्नत किस्मों की पहचान विमोचन के लिए की गयी।
इन 26 उन्नत किस्मों में श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय जोबनेर द्वारा विकसित जौ की चार किस्में आरडी 3088, आरडी 3089, आरडी 3102 एवं आरडी 3109 भी शामिल हैं। इनमें आरडी 3088 एवं आरडी 3089 छिलका रहित जौ की किस्में हैं, जबकि आरडी 3102 एवं आरडी 3109 लवणीय एवं क्षारीय क्षेत्रों के लिए उपयुक्त किस्में हैं, वहीं आरडी 3089 को दो कृषि-जलवायु क्षेत्रों के लिए अनुमोदित किया गया है। इन किस्मों में अधिक उत्पादन क्षमता, बेहतर गुणवत्ता, रोग प्रतिरोधकता तथा विभिन्न कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप अनुकूलता जैसे गुणों को प्राथमिकता दी गयी है। 65वीं अखिल भारतीय समन्वित गेंहू एवं जौ अनुसंधान परियोजना की वार्षिक कार्यकर्ता बैठक के दौरान आयोजित किस्म पहचान समिति की बैठक में विभिन्न उन्नत गेंहू एवं जौ की किस्मों का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया गया। उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता, रोग प्रतिरोधकता एवं क्षेत्रीय अनुकूलता के आधार पर नई किस्मों की अनुशंसा पर विस्तृत चर्चा की गयी।
कार्यक्रम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की सहायक महानिदेशक डॉ. पूनम जसोटिया ने कहा कि गेंहू एवं जौ देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण फसलें हैं। बदलते जलवायु परिदृश्य को देखते हुए अधिक उत्पादन देने वाली, रोग प्रतिरोधी तथा जल एवं संसाधन दक्ष किस्मों का विकास समय की आवश्यकता है। वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नयी किस्मों को शीघ्र किसानों तक पहुंचाना ही अनुसंधान की वास्तविक सफलता है।
निदेशक कृषि अनुसंधान डॉ. उम्मेद सिंह ने कहा कि कृषि अनुसंधान का मुख्य उद्देश्य किसानों की उत्पादन लागत को कम करते हुए उत्पादकता और आय में वृद्धि करना है। कार्यशाला में वैज्ञानिकों द्वारा साझा किए गए अनुसंधान परिणामों और नयी किस्मों से राजस्थान सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों के किसानों को लाभ मिलेगा। उन्होंने बदलते मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए जलवायु अनुकूल तकनीकों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बतायी।
राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान दुर्गापुरा के निदेशक डॉ. सुरेन्द्र सिंह ने कहा कि जयपुर में आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यशाला ने देशभर के गेंहू एवं जौ वैज्ञानिकों को एक मंच पर अपने अनुसंधान अनुभव साझा करने का अवसर प्रदान किया। किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप अनुसंधान को आगे बढ़ाना तथा नयी तकनीकों एवं उन्नत किस्मों को खेत तक पहुंचाना संस्थान की प्राथमिकता है। भारतीय गेंहू एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल के निदेशक डॉ रतन तिवारी ने कहा कि किस्म पहचान समिति द्वारा 15 गेंहू एवं 11 जौ की किस्मों की पहचान किसानों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इन किस्मों में अधिक उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता, रोग प्रतिरोधकता एवं विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों के अनुरूप अनुकूलता जैसे गुणों को प्राथमिकता दी गयी है।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों का प्रयास है कि नयी किस्में शीघ्र किसानों तक पहुंचें और देश के गेहूं एवं जौ उत्पादन को नयी ऊंचाइयों तक ले जायें।
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