नयी दिल्ली , अप्रैल 08 -- दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बुधवार को कहा कि भारत का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि हमारे युवा अपने संस्थानों, संविधान और उसमें अपनी भूमिका को कितनी गहराई से समझते हैं।

श्री गुप्ता ने दिल्ली विश्वविद्यालय के भारती कॉलेज के विद्यार्थियों के साथ यहाँ संवाद में आज इस बात पर बल दिया कि शिक्षा एवं सार्वजनिक जीवन के बीच सेतु स्थापित करना समय की आवश्यकता है तथा विधान सभा जैसे संस्थानों को सीखने, संवाद और सहभागिता के खुले मंच के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत का स्वतंत्रता संग्राम विधान सभाओं जैसे मंचों से गहराई से जुड़ा रहा है, जहाँ शासन, अधिकारों और प्रतिनिधित्व से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होती थी। उन्होंने बताया कि वर्ष 1925 में स्पीकर के निर्वाचन और प्रतिनिधित्व के विस्तार ने लोकतांत्रिक भागीदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन को दर्शाया।

विधानसभा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि गोपाल कृष्ण गोखले, विठ्ठलभाई पटेल, लाला लाजपत राय और बिपिन चंद्र पाल जैसे नेताओं ने न केवल स्वतंत्रता आंदोलन को दिशा दी, बल्कि संसदीय परंपराओं को भी सशक्त बनाया। उन्होंने मार्च 1919 में इसी सदन में पारित रॉलेट एक्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि इसने देशभर में जनाक्रोश को और तीव्र किया। इसके पश्चात हुई घटनाएँ, विशेषकर जलियांवाला बाग त्रासदी, औपनिवेशिक दमन की गंभीरता और जनता के सशक्त प्रतिरोध का प्रतीक थीं। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं पर विधान मंचों में हुई बहसों ने उन्हें राष्ट्रीय जागरण और जन-सशक्तिकरण के केंद्र के रूप में स्थापित किया।

समकालीन शिक्षा सुधारों का उल्लेख करते हुए श्री गुप्ता ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को एक दूरदर्शी पहल बताते हुए कहा कि इसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि यह नीति रटने की प्रवृत्ति से आगे बढ़कर बहु-विषयक शिक्षा, आलोचनात्मक चिंतन और भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ गहन जुड़ाव को प्रोत्साहित करती है, जिससे विद्यार्थी जागरूक और जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित हो सकें।

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